००मैंने देखे पेड़००

+-+-+-+ मित्र ने कहा मुझसे विद्यालय के बरामदे में पड़े अस्त-व्यस्त फर्नीचर को देखकर देखो मित्र कैसी पड़ी है बेंचे पैर ऊपर किए मैंने

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वे अपनी चीजें पहचानते हैं

बेटा (अपनी मां से) – मम्मी, आज मेरी मित्र-मंडली अपने घर आ रही हैं। प्लीज मेरे सारे खिलौने आपकी अलमारी में छिपा दो। मम्मी-

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