जब अपनी ही मृत्यु का इस तरह उत्सव मनाने लगा मंत्री

  ललितनगरी के महाराज सारंगदेव अपने मंत्री के ज्ञान व उनकी चेतना से कुपित थे। एक बार मंत्री के जन्मदिन समारोह के दौरान जब

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प्राणियों की रक्षा ही धर्म का एकमात्र उद्देश्य

  एक दिन सुबह-सुबह गुरुजी ने अपने सभी शिष्यों को बुलाया। उनमें एक नया साधारण भक्त भी था जिसकी गुरुजी के प्रति सच्ची श्रद्धा

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सुंदरता को लेकर चाणक्य ने क्या खूब कहा

  सम्राट चंद्रगुप्त देखने में सुंदर और गोरे थे, जबकि चाणक्य काले और कुरूप। एक बार दोनों में नीति संबंधी बहस हो रही थी।

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