रात में कारों के फूटते काँच

 

 

(शरद खरे)

सिवनी शहर में कानून और व्यवस्था की स्थिति क्या है इस बात का अंदाजा शनिवार और रविवार की दरमियानी रात में शहर के पॉश इलाके बारापत्थर में डेढ़ दर्जन से ज्यादा कारों के काँच फूटने की घटना से लगाया जा सकता है। एक ही रात में एक ही क्षेत्र में किन्ही शरारती तत्वों के द्वारा इस वारदात को अंजाम दिया गया और रात में पुलिस की गश्त करने वाला दल अपना काम भी मुस्तैदी से करती रही।

रविवार की सुबह जब लोग सोकर उठे तो उन्हें इस बात का भान हुआ कि उनमें से कुछ लोगों की कारों के शीशे किन्हीं उपद्रवी तत्वों के द्वारा तोड़ दिये गये हैं। पहले तो लोगों को लगा कि किसी व्यक्ति ने आपसी दुश्मनी के चलते इस काम को अंजाम दिया होगा, पर जब सोशल मीडिया पर एक के बाद एक चित्र आने आरंभ हुए तब लोगों को लगा कि किसी गिरोह के द्वारा इस काम को अंजाम दिया गया है।

इस मामले में कुछ सीसीटीवी फुटेज भी सामने आये हैं। इन फुटेज में एक युवक जो मोटर साईकिल पर सवार है उसके द्वारा हाथ से पत्थर फेंककर इस घटना को अंजाम दिया जा रहा है। यह काम एक ही युवक के द्वारा किया गया प्रतीत हो रहा है। इसके बाद भी पुलिस अभी तक खाली हाथ ही है।

दिन भर भागदौड़ कर लोग रात में चैन से इसलिये सोते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का भरोसा है कि रात के समय पुलिस के द्वारा मुस्तैदी के साथ गश्त की जायेगी और वे तथा उनका सामान सुरक्षित रहेगा। रात में अगर किसी के द्वारा इस तरह की घटना की गयी तो यह निश्चित तौर पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाने के लिये पर्याप्त माना जा सकता है।

यह घटना जिस रात घटी उस रात कोतवाली पुलिस के द्वारा बीट बांटी जाकर रात्रि गश्त के लिये अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गयी होगी। उस रात जिनकी ड्यूटी थी वे रात में क्या कर रहे थे इस पर सवाल जवाब किये जाने चाहिये। संभव है कि पुलिस के जिला प्रमुख के द्वारा ऐसा किया भी गया हो!

बाहुबली चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं। इस चौराहे पर भी एक कार के काँच फोड़े गये हैं। इसका भी एक सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर आया है। इस फुटेज में मोटर साईकिल सवार के द्वारा हाथ से कुछ फेंका जा रहा है। विडंबना ही कही जायेगी कि शक्तिशाली, हाई रेजूलेशन वाले कैमरों में उस मोटर साईकिल का न तो नंबर दिख रहा है और न ही उसके चालक का चेहरा!

देर रात तक मोटर साईकिल सवारों के द्वारा सड़कों का सीना रौंदा जाता है। रात के स्याह अंधेरे में सभ्य समाज के लोग तो घरों से निकलते नहीं हैं, फिर पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही करने से गुरेज क्यों करती है जो रात के समय सड़कों पर अकारण ही होते हैं।

सिवनी में न तो चौबीसों घण्टे काम करने वाले कार्यालय हैं और न रोज ही शादी ब्याह, मेले ठेले का आयोजन होता है जो देर रात तक बिना किसी कारण के लोग सड़कों पर दिखायी दें। बारापत्थर क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां चरम पर हैं। पिछले साल इसी क्षेत्र में हवाई फायर की बात भी सामने आयी थी।

अब आचार संहिता लग गयी है तब पुलिस और प्रशासन भी एक्शन मोड में एलर्ट ही हो गया होगा। कम से कम आचार संहिता के दौरान ही इस तरह की कवायद की जाये ताकि जरायमपेशा लोगों के मन में कानून का उत्पन्न पैदा हो सके। इसके लिये पुलिस के सड़ांध मारते तंत्र में सुधार की आवश्यकता है।

संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह एवं जिला पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार से जनापेक्षा है कि वे एक बार पुलिस कंट्रोल रूम सहित जिले के सभी पुलिस थानों में फोन लगाकर रिस्पॉन्स टाईम अवश्य देखें। इसके अलावा पुलिस की मॉक ड्रिल की आवश्यकता भी शिद्दत से महसूस की जा रही है जो अवध किशोर पाण्डे के एसपी रहते आरंभ हुई थी और उनके तबादले के बाद मानो यह रिवाज समाप्त ही हो गया है।