जनता या ठेकेदार का हित साधने में लगा प्रशासन!

 

 

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आम आदमी पार्टी जिला सचिव याह्या आरिफ ने दी प्रतिक्रिया

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। नवीन जलावर्धन योजना में तारीख पर तारीख ही मिलती दिख रही है। जो ठेकेदार समय सीमा में काम करने में असफल रहा है उस ठेकेदार का हित प्रशासन के द्वारा साधने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि ठेकेदार को अब तक काली सूची में डाला जाकर उसे किये गये भुगतान की वसूली की प्रक्रिया पूरी कर लेना चाहिये था।

उक्ताशय की प्रतिक्रिया आम आदमी पार्टी के जिला सचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता याह्या आरिफ कुरैशी ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तय समय से चार साल विलंब से चल रही योजना आज भी अपूर्ण ही है। इसके लिये या तो नगर पालिका प्रशासन जवाबदेह है या फिर इस योजना का काम कर रही ठेकेदार फर्म।

याह्या आरिफ कुरैशी का कहना था कि सिवनी में नयी परंपरा का आगाज किया जा रहा है। जिस ठेकेदार को 11 माह में योजना को पूरा कर लेना चाहिये था उस ठेकेदार को सिवनी के तत्कालीन निर्दलीय विधायक दिनेश राय के द्वारा फरवरी 2018 में अल्टीमेटम दिया जाता है कि योजना फरवरी 2018 में पूरी कर ली जाये।

उन्होंने कहा कि ठेकेदार के पक्ष में नगर पालिका प्रशासन खड़ा दिखायी देता आया है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधायक के द्वारा समय सीमा तय किये जाने के एक साल बाद भी नगर पालिका प्रशासन के चुने हुए प्रतिनिधियों के द्वारा ठेकेदार के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही नहीं की गयी है।

वरिष्ठ अधिवक्ता याह्या आरिफ कुरैशी ने आगे कहा कि यह हास्यास्पद ही है कि जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा 28 फरवरी तक की समय सीमा निर्धारित किये जाने के बाद भी 13 मार्च तक इस योजना का पानी लोगों को नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन इस बात से ही खुश होकर अपनी पीठ ठोक रहा है कि इस योजना का पानी बबरिया तक पहुँच गया है।

उन्होंने कहा कि नयी और पुरानी पानी की टंकियों से बिछायी गयी पाईप लाईन से अब तक लोगों के घरों में कनेक्शन प्रदाय नहीं किये गये हैं और प्रशासन के अधिकारी भी हाथ पर हाथ रखे ही बैठे हैं। जिला कलेक्टर लगातार ही इस योजना की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, जबकि यह काम पालिका के तकनीकि अमले का है।

आम आदमी पार्टी के जिला सचिव ने कहा कि इस बात से साफ हो रहा है कि नगर पालिका का तकनीकि अमला किस तरह की कार्यप्रणाली को अपनाये हुए है और इसके बाद भी जिला प्रशासन के द्वारा तकनीकि अमले को किसी भी तरह से दण्डित करने की कवायद नहीं की जा रही है।

याह्या आरिफ कुरैशी ने आगे कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता वाली प्रक्रिया अपनायी जानी चाहिये। उन्होंने नगर पालिका के चुने हुए प्रतिनिधियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि काँग्रेस और भाजपा दोनों ही सियासी दलों के नुमाईंदों ने इस योजना को चारागाह बना लिया है, जिससे आम जनता इसके परिणाम भुगत रही है।

57 thoughts on “जनता या ठेकेदार का हित साधने में लगा प्रशासन!

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