बीरबल की खिचड़ी बनाम जलावर्धन योजना!

 

 

0 कलेक्टर का अल्टीमेटम भी . . . 08

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। नवीन जलावर्धन योजना भी अब मॉडल रोड की ही तरह बीरबल की खिचड़ी की मानिंद प्रतीत हो रही है। दोनों ही योजनाओं की तय की गयी समय सीमा पूरी होने के सालों बाद भी दोनों ही योजनाएं पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकी हैं।

नवीन जलावर्धन योजना में ठेकेदार पर काम आरंभ करने के दौरान ही आरोप लगना आरंभ हो गया था कि ठेकेदार के द्वारा नियम कायदों का खुला माखौल उड़ाते हुए इसका काम किया जा रहा है। तत्कालीन निर्दलीय (वर्तमान भाजपा के) विधायक दिनेश राय के द्वारा तय की गयी समय सीमा से 383 दिन बीत जाने और जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा तय की गयी मियाद के 17 दिन बीत जाने के बाद भी इस योजना का पानी लोगों को नहीं मिलने से यह साफ हो गया है कि ठेकेदार को किसी का भी भय नहीं रह गया है।

मजे की बात तो यह है कि तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी के द्वारा पिछले साल फरवरी माह में किये गये सतही निरीक्षण में इस योजना की कोई प्रयोगशाला मौके पर नहीं पायी गयी थी, इसके बाद भी न तो उनके ही द्वारा न ही पालिका के द्वारा ठेकेदार के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही की गयी है।

इस मामले में आश्चर्य जनक पहलू यह है कि इस योजना की जाँच सरकारी स्तर पर दो बार करायी गयी। पहली बार जिला स्तर की जाँच में अनेक खामियां प्रकाश में आने के बाद ठेकेदार पर एक करोड़ रूपये का जुर्माना लगाया गया था। वहीं राज्य स्तरीय समिति को जाँच में खामियां नहीं मिलीं, जिससे यही प्रतीत हो रहा है कि दोनों में से किसी एक जाँच समिति ने गलत रिपोर्ट दी थी।

अब जबकि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है तब यह माना जा रहा था कि काँग्रेस के द्वारा इस योजना की जाँच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवायी जायेगी, किन्तु जिला काँग्रेस, नगर काँग्रेस सहित काँग्रेस के दोनों विधायक अर्जुन सिंह काकोड़िया और योगेंद्र सिंह के द्वारा इस मामले में अब तक किसी तरह की कार्यवाही नहीं की गयी है, और अगर की भी गयी है तो इसकी जानकारी नागरिकों को नहीं दी गयी है।

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