ऐन त्यौहार से पहले अपने गंतत्य पर पहुँचने की कोशिश करें

 

 

इस स्तंभ के माध्यम से मैं सिवनी वासियों को यह सलाह देना चाहता हूँ कि यदि वे किसी त्यौहार के आसपास अपने घर या और कहीं आना या जाना चाहते हैं तो यदि वे इसके पूर्व ऐसा करते हैं तो आर्थिक रूप से उन्हें नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

दरअसल सिवनी में परिवहन और यातायात जैसे विभागों के निकम्मेपन के कारण कई बस संचालक यात्रियों की जेब काटने पर तुले हुए हैं। बसों में किराया सूची चस्पा नहीं की गयी है जिसकी आड़ में कई बस संचालक मनमाना और अनाप-शनाप किराया यात्रियों से वसूल कर रहे हैं जिसकी कोई सुनवायी करने वाला जिले में नजर नहीं आ रहा है।

बस संचालकों के द्वारा कुछ विशेष अवसरों पर मनमाना किराया वसूलने की खबरें इसके पूर्व समाचार पत्रों में ही पढ़ने को मिलीं थीं लेकिन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण तब देखने को मिला जब नागपुर से सिवनी बस के माध्यम से आना पड़ा। इस दौरान चार बसें छोड़ना पड़ी लेकिन कोई भी बस वाला नागपुर से सिवनी तक का किराया 250 रूपये से कम करने के लिये तैयार नहीं था।

ज्यादा किराया देने से बचने के चक्कर में आखिरकार जब रात होने लगी तब पाँचवीं बस में शाम सात बजे सवार होने का फाईनली निर्णय लेना पड़ा और इसमें मुझे सिवनी तक के सफर के लिये 300 रूपये चुकाना पड़े। परेशानी वाली बात तो यह है कि इसकी रसीद या टिकिट भी बनाकर नहीं दी गयी। यहीं नहीं बल्कि एक-एक बस में लगभग 90 से 100 यात्री ठूंस-ठूंस कर भरे जा रहे थे।

बस नागपुर से ही ओवर लोड की परिभाषा तोड़कर रवाना हुई थी लेकिन उसके बाद भी रास्ते में जहाँ भी कोई यात्री हाथ देकर ठसाठस भरी बस में सवार होना चाह रहा था तो उसे भी भेड़ बकरियों के मानिंद बस में भरा जा रहा था। संबंधित विभाग इस कदर लापरवाह हैं कि यदि इस दौरान कोई बस यदि किसी दुर्घटना का शिकार हो जाये तो हताहतों की संख्या का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।

सवाल यह उठता है कि परिवहन और यातायात विभाग क्या सिवनी में गहरी निद्रा में डूबे हुए हैं जो उन्हें सिवनी से जाने या यहाँ आने वाली ठसाठस भरी बसें नहीं दिख रही हैं। ये विभाग यह क्यों नहीं देख रहे कि किराया सूची चस्पा न करके बस संचालक खुलेआम नियमों का उल्लंघन करते हुए लूटपाट मचाये हुए हैं। दो पहिया वाहनोें का चालान बनाने से शायद यातायात विभाग को फुर्सत कभी मिल जाये तो उनके सामने से नियम विरूद्ध गुजर रहीं बसों पर संबंधित लोगों की नजरें इनायत हो सकेंगी।

आशीष भटनागर

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