छेड़छाड़ के आरोपी को सुनाई अनूठी सजा

 

 

 

 

हफ्ते में 2 दिन अस्पताल में करनी होगी जनसेवा

(ब्यूरो कार्यालय)

ग्‍वालियर (साई)। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने छेड़खानी के आरोपी की तीन साल की सजा को निलंबित करने के लिए उसके सामने अनोखी शर्त रखी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की उम्र 20 साल है। अगर वह जनसेवा करता है तो उसमें सुधार जल्द आएगा। इसलिए वह बमोरी जिला गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में हफ्ते में दो दिन मरीजों की सेवा करेगा। यह काम उसे अगले 6 महीने तक करना होगा। हर दो महीने में आरोपी के अधिवक्ता को उसके काम की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। अपील की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने की।

गुना जिले के बमोरी थाने में एक नाबालिग ने 6 नवंबर 2015 को फिरोज खान निवासी हरिजन मोहल्ला बमोरी के खिलाफ शिकायत की। शिकायत के अनुसार नाबालिग स्कूल जा रही थी और रास्ते में फिरोज खान ने उसका हाथ पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट व छेड़खानी का केस दर्ज किया। जांच के बाद अपर सत्र न्यायालय में चालान पेश कर दिया। अपर सत्र न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए 2 मार्च 2019 को 3 साल की सजा सुनाई और उसे जेल भेज दिया।

आरोपी ने हाईकोर्ट में सजा के फैसले को चुनौती दी। आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि वह नवयुवक है। उसकी गलती सिर्फ इतनी है कि उसने हाथ पकड़ने की कहा था, लेकिन उसके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करा दी। अगर उसे जेल में रखा जाता है तो उसका भविष्य खराब हो जाएगा। हाईकोर्ट ने केस का अध्ययन के बाद आरोपी की सजा को निलंबित करने के लिए अनोखी शर्त रखी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी नवयुवक है। उसे एक सुधरने का मौका दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि उसे बमोरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मरीजों की चार घंटे सेवा करनी होगी। हफ्ते में दो दिन यह काम करना होगा। उसके अधिवक्ता काम की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे और आरोपी अपने अनुभव भी बताएगा। जेल से उसे 50 हजार के निजी मुचलके पर रिहा किया जाएगा। कोर्ट ने उसकी अपील को फाइनल सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

यह आदेश भी दे चुका है कोर्ट

विमल ज्वैलर्स के संचालक पर झांसी रोड थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ था। आरोपी ने फरियादी को पैसे लौटा दिए थे। इसके बाद एफआईआर निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने आरोपी व फरियादी के समक्ष शर्त रखी कि उन्हें शहर का एक गार्डन विकसित करनाा होगा और शहीद सैनिकों की मदद के लिए सरकार के कोष में पैसे भी जमा करने होंगे।

अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह कुशवाह की याचिका अदम पैरवी में खारिज हो गई थी। कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं है। इसलिए अधिवक्ता को पौधे लगाने होंगे और उसके फोटो कोर्ट में पेश करने होंगे। उसके बाद याचिका सुनी जाएगी।

कोर्ट ने समाज में संदेश देने के लिए करीब एक सैकड़ा आदेश ऐसे किए हैं, जिनमें पौधे लगाने, अनाथालय में बच्चों की सेवा और उन्हें कुछ गिफ्ट देना सहित राशि दान कराई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *