जिम्मेदारी से नजरें फेरीं आरटीओ कार्यालय ने

 

 

निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां लेकर फर्राटा भर रहीं यात्री बस!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। जिले में परिवहन विभाग के द्वारा वैध और अवैध यात्री बसों में सवारियों की गिनती शायद ही कभी की गयी हो। निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर ये यात्री वाहन फर्राटे भर रहे हैं और परिवहन विभाग के आला अधिकारी दीगर गैर जरूरी कामों में मशगूल नजर आ रहे हैं।

जिले से होकर गुजरने वालीं यात्री बसों पर अगर नजर डाली जाये तो इनमें भेड़ बकरियों के मानिंद यात्री भरे नजर आते हैं। यात्री बस संचालन, जिले में भ्रष्टाचार का जरिया बन गया है। यह बात, जिले के विभिन्न मार्गों पर संचालित बसों के साथ अंर्तराज्यीय संचालित हो रहीं बसों में ओवरलोड सवारी लेकर फर्राटा भरने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं होने पर कही जा रही है। आये दिन हो रहे हादसे के बाद भी महकमा चुप्पी साधे हुए है।

गौरतलब है कि जिले के विभिन्न मार्गों से होकर मध्य प्रदेश के अलावा अन्य प्रदेशों और सिवनी के अलावा अन्य जिलों के यात्री वाहन गुजरते हैं। इन बसों में ओवरलोड यात्रियों को भरकर बस, सड़क पर फर्राटा भरती है। इसकी वजह अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की स्वेच्छाचारिता को ही माना जा रहा है।

यात्रियों की मानें तो बस संचालक स्लीपर बस में दो स्लीपर सीट पर दो यात्रियों की जगह पाँच से सात सवारियां बैठा देते हैं। अगर किसी यात्री के द्वारा इस पर आपत्ति की जाती है तो बस के स्टॉफ के द्वारा यात्रियों से अभद्रता, यहाँ तक कि मारपीट तक कर दी जाती है।

मेले ठेले, शादी ब्याह, विद्यालयों के अवकाश होने के कारण यात्रियों की आवाजाही इन दिनों बढ़ जाती है। इसके चलते यात्री बस का आलम यह रहता है कि केबिन तक में ठसाठस सवारियां भरी रहती हैं। जिला प्रशासन के अधिकारी अगर किसी भी दिन सड़कों पर दौड़ रहीं यात्री बसों का औचक निरीक्षण कर लें तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है।

स्लीपर में दिन के समय भी यात्रियों को चार से पाँच की संख्या में बैठाया जाता है। सबसे अधिक यह स्थिति दिन में जबलपुर से सिवनी, छिंदवाड़ा, नागपुर व बालाघाट के लिये चलने वाली बसों में देखी जा सकती है। अधिकांश बसों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं रहते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में यदि इन मार्गों पर चलने वाली बस हादसे का शिकार होती है तो क्या स्थिति हो सकती है, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके बावजूद क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में पदस्थ महकमा कोई कार्यवाही नहीं करता दिखता है। परमिट की जाँच नियमित नहीं की जाती है। स्पीड गर्वनर पर भी ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है।

यह आलम तब है जब विगत माह घंसौर, धनौरा, जबलपुर मार्ग आदि क्षेत्रों में बस पलटने की घटनाएं हो चुकी है। चर्चाएं यहाँ तक हैं कि दिन – रात सरे आम नियमों को धता बताते हुए संचालित हो रहीं इन बसों की आड़ में परिवहन विभाग के आला अधिकारियों को सुविधाएं पहुँचाये जाने की बात बस संचालकों द्वारा कही जाती रही हैं।

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