1 अप्रैल से बदल गये रियल एस्टेट के नियम

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

इंदौर (साई)। नये वित्त वर्ष के साथ जीएसटी के नये नियम भी लागू हो रहे हैं। चुनावी मौसम में जीएसटी में तमाम राहत की घोषणाएं बीते दिनों हुई थी। 01 अप्रैल से लागू होने वाले नये नियमों का लाभ लेना व्यवसायियों के लिये आसान नहीं होगा।

जीएसटी रजिस्ट्रेशन में टर्नओवर दोगुना करने से लेकर कंपोजिशन व रियल एस्टेट के लिये टैक्स की राहत भरी दरें भी 01 अप्रैल से लागू हो रही है। इनका लाभ लेने के लिये पुराने स्टॉक पर पुराना टैक्स जमा करने, शेष आईटीसी रिवर्स करना होगी।

रजिस्ट्रेशन-कंपोजिशन : 01 अप्रैल से जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिये टर्नओवर की सीमा 20 से बढ़ाकर 40 लाख हो रही है। बढ़ी सीमा के बाद ऐसे व्यापारी जो 20 लाख से ज्यादा टर्नओवर होने के कारण जीएसटी में रजिस्टर्ड थे, 1 अप्रैल के बाद अपना रजिस्ट्रेशन निरस्त करवाने की दिशा में बढ़ सकेंगे। हालांकि इससे पहले उन्हें 31 मार्च तक के क्लोजिंग स्टॉक पर जीएसटी चुकाना होगा।

कंपोजिशन स्कीम में जाने के लिये टर्नओवर की सीमा बढ़ाकर 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.50 करोड़ कर दी गयी है। इसी के साथ सप्लाई के साथ टर्नओवर का 10 फीसद तक सेवा प्रदान करने वालों को भी कंपोजिशन में जाने की छूट 1 अप्रैल से मिल रही है। सिर्फ सेवा या मिक्स सप्लाई करने वालों को भी 6 प्रतिशत टैक्स चुकाकर कंपोजिशन में जाने का लाभ 01 अप्रैल से मिल रहा है।

रियल एस्टेट : रियल एस्टेट में हाउसिंग प्रोजेक्ट पर टैक्स की घटी दर यानी 12 से 05 प्रतिशत का लाभ 01 अप्रैल से लागू होगा। पुराने प्रोजेक्ट वाले भी इस स्कीम को चुन सकेंगे। हालांकि नयी छूट का लाभ लेने के लिये पुरानी आईटीसी जो अभी शेष है, उसे रिवर्स करना होगा।

रियल एस्टेट में हाउसिंग प्रोजेक्ट पर 80 फीसदी सप्लाई रजिस्टर्ड डीलर्स से लेने की अनिवार्यता का नियम भी 01 अप्रैल से लागू हो रहा है। अनरजिस्टर्ड डीलर से 20 फीसदी से ज्यादा माल या सेवा लेने पर 18 प्रतिशत टैक्स आरसीएम के तहत देना होगा। सीमेंट की सप्लाई पर टैक्स की दर 28 प्रतिशत होगी।

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