फीस जमा न करने पर विद्यार्थी को नहीं कर सकते परेशान!

 

 

सात दिनों बाद जागा शिक्षा विभाग, पर नहीं की संबंधितों के खिलाफ कोई कार्यवाही!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन के द्वारा धमकी भरी प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के सात दिनों बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की तंद्रा टूटी है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा एक विज्ञप्ति जारी की गयी है पर इस तरह की धमकी भरी प्रेस विज्ञप्ति जारी करने वालों के खिलाफ डीईओ ने अपना मौन नहीं तोड़ा है।

जिला शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षरों से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार अशासकीय शालाओं में अध्ययनरत बच्चों को समय पर फीस जमा न करने के कारण प्रताड़ित किये जाने के मामले संज्ञान में आते है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली द्वारा अशासकीय शालाओं के लिये निर्देश जारी किया गया है कि बच्चों को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित करना जूपिनाईल जस्टिस (केयर एण्ड प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन्स) एक्ट 2015 के सेक्शन 75 का उल्लंघन है। बच्चों की फीस समय पर प्राप्त न होने का मुद्दा स्कूल प्रबंधन तथा अभिभावकों से संबंधित है। यह एक वित्तीय विषय है, इसलिये इसका समाधान अभिभावक से ही चर्चा कर की जानी चाहिये।

विज्ञप्ति के अुनसार इसी प्रकार राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा 07 दिसंबर 2018 को प्रेषित पत्रानुसार शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत यह व्यवस्था है, कि प्रारंभिक शिक्षा स्तर पर स्कूल में अध्ययनरत किसी भी बच्चे को कक्षा में रोका या निष्कासित नहीं किया जायेगा।

विज्ञप्ति के अनुसार इसी प्रकार धारा 17 में यह प्रावधानित है, कि बच्चों को शारीरिक दण्ड या मानसिक उत्पीड़न नहीं किया जायेगा। अधिनियम के प्रावधानुसार किसी विद्यालय में प्रवेश प्राप्त बालक को किसी कक्षा में नहीं रोका जायेगा या विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा पूरी किये जाने तक निष्कासित नहीं किया जायेगा और किसी बालक को शारीरिक दण्ड नहीं दिया जायेगा या उसका मानसिक उत्पीड़न नहीं किया जायेगा।

विज्ञप्ति के अनुसार धारा 16 एवं 17 में वर्णित बच्चों के अधिकारों का प्रावधान अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं पर भी लागू होगा। समस्त शैक्षणिक संस्थाओं से उक्त निर्देशों का कड़ाई से पालन करने सुनिश्चित करने को कहा गया है। यदि किसी स्कूल द्वारा उक्त निर्देशों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके विरूद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही किये जाने की बात कही गयी है।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि 26 मार्च को प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन के द्वारा फीस जमा न कराने वाले विद्यार्थियों के नाम सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किये जाने सहित अनेक धमकियों से युक्त प्रेस नोट जारी किया गया था। इसके बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा इस मामले में विज्ञप्ति जारी करने वालों और संघ के सदस्यों के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही न किया जाना आश्चर्य जनक ही माना जा रहा है।

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