अंततः जारी हुआ प्रतिबंधात्मक आदेश

 

 

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शैक्षणिक सत्र के आरंभ होने के उपरांत जारी हुआ आदेश

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। नया शैक्षणिक सत्र आरंभ होने के दूसरे दिन अंततः कॉपी, किताब, गणवेश आदि के संबंध में जिला प्रशासन के द्वारा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के जारी होने के पहले लगभग सत्तर से अस्सी फीसदी पालकों के द्वारा कॉपी, किताब और गणेवश आदि की खरीद की जा चुकी है, इसलिये यह आदेश औपचारिक ही माना जा रहा है।

मंगलवार को जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार जिला कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी प्रवीण सिंह द्वारा जिले के अशासकीय विद्यालयों द्वारा निजि प्रकाशकों की पुस्तकें पाठ्यक्रम हेतु उपयोग करने तथा अपना ड्रेस कोड निहित करते हुए उपरोक्त पुस्तकों तथा यूनिफॉर्म आदि बाजार की किसी विशेष दुकान में ही उपलब्ध होने की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए लोकहित में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये गये हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 (2) अंतर्गत पारित इस आदेश में जिले की प्रत्येक आशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं को स्कूल शिक्षा विभाग के मार्गदर्शी सिद्धांत का पालन करना अनिवार्य होगा तथा मार्गदर्शी सिद्धांत का उल्लंघन आदेश के तहत दण्डनीय होगा।

विज्ञप्ति के अनुसार इस आदेश के अनुसार जिले के सभी पुस्तक एवं गणवेश विक्रेताओं को अपनी दुकान में कोई भी कितनी भी संख्या में पुस्तक या यूनिफॉर्म क्रय कर सकता है। उसे पुस्तकों अथवा यूनिफॉर्म का पूरा सेट लेने की आवश्यकता नहीं है, की सूचना लगाते हुए पालन करना अनिवार्य होगा।

विज्ञप्ति के अनुसार इसी प्रत्येक विद्यालय को अपने सूचना पटल में विद्यालयों से संबंधित पुस्तकों तथा यूनिफॉर्म की उपलब्धता वाली दुकानों की सूची प्रदर्शित करनी होगी। साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि किसी विशेष दुकान से पुस्तकें एवं यूनिफॉर्म लेना अनिवार्य नहीं है।

विज्ञप्ति के अनुसार प्रत्येक विद्यालय को अपने विद्यालय से संबंधित पुस्तकों की सूची लेखकों व प्रकाशकों के नाम तथा मूल्य, विद्यालय के सूचना पटल तथा वेबसाईट में प्रदर्शित करना होगा तथा अभिभावकों के माँगे जाने पर उपलब्ध कराना होगा। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भी कक्षा 01 से 12वीं तक की कक्षावार पुस्तकों की सूची प्रतिवर्ष उपलब्ध करानी होगी।

पालकों के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार इस तरह का आदेश अगर एक पखवाड़े पहले जारी होता और इस आदेश का पालन किस तरह सुनिश्चित होगा, इस बारे में प्रशासन के द्वारा पारदर्शी और स्पष्ट व्यवस्था बनायी गयी होती तो पालक जेब तराशी से बच गये होते।

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