यहाँ चैत्र में होती माँ की प्रतिमा की स्थापना

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

घंसौर (साई)। चैत्र नवरात्रि की शुरूआत इसी सप्ताह शनिवार से होने वाली है। इसे लेकर सिवनी जिला भर के मंदिरों में तैयारियां जोर – शोर से जारी हैं।

आमतौर पर शारदेय नवरात्रि में माँ भवानी की प्रतिमा की स्थापना पूरे देश में की जाती है लेकिन घंसौर में चैत्र नवरात्रि में पूरे विधि विधान से माँ दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना पिछले सात वर्षों से की जा रही है। माँ शारदा मंदिर में यह प्रतिमा स्थापित की जाती है।

देखने मिलते हैं चमत्कार : आयोजन समिति से जुड़े शिव दत्त कौशल, अनिल जैन, हल्के प्रसाद सेन, सुनील सेन, मनीष नामदेव आदि ने बताया कि श्री सार्वजनिक शारदा मंदिर घंसौर में माता का यह मंदिर 05 अप्रैल 2000 में बनाया गया था और तभी से लोग मातारानी के दिव्य दर्शन कर मनोवांछित फल पाते आ रहे हैं।

इसके अलावा अनेक चमत्कार यहाँ देखने को मिलते है। मातारानी की स्थापना के पहले यहाँ पर एक वृक्ष था जो बिना किसी सहारे या हवा के अचानक जोर – जोर से हिलने लगता था, तभी से यहाँ के लोग इस जगह को चमत्कारी मानते हैं। रोज मातारानी की दिव्य आरती कर दर्शन से वे धन्य होते हैं।

मैहर की माता शारदा के बाद लोगों की आस्था इस मंदिर से जुड़ गयी है। लोग फरियाद लगाते हैं, लोगों को मनवांछित फल भी यहाँ मिलते हैं। शारदा माता उनकी फरियाद सुनती है। यहाँ प्रारंभ से ही मंदिर की समिति के लोग इस मंदिर के प्रति अपनी निष्ठा भाव से सेवा दे रहे हैं और चैत्र नवरात्र पर्व भी इस मंदिर में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

सात वर्षों से जारी हैं आयोजन : इस मंदिर में प्रत्येक वर्ष चैत्र के मास में माता रानी की प्रतिमा की स्थापना की जाती रही है। पिछले सात वर्षों से यह आयोजन जारी है। समिति द्वारा इस मंदिर में मनोवांछित अखण्ड ज्योति कलश एवं जवारों की स्थापना का आयोजन किया जाता है।

आसपास के एवं यहाँ के श्रद्धालु अपनी श्रद्धा भाव से मातारानी के द्वारे नौ दिन की अखण्ड ज्योति प्रज्ज्वलित करवाते और खप्पर रखवाते हैं। जवारों की छटा देखते ही बनती है। तरह – तरह के कार्यक्रम पर्व में किये जाते हैं। इसके साथ ही बताया गया है कि शारदा मंदिर में 19 वर्षों से जवारे रखे जाते हैं।

अंतिम दिन होता है विसर्जन : नवरात्रि के अंतिम दिन पूरे उत्साह के साथ माता रानी की प्रतिमा का विसर्जन स्थानीय मेहगाँव डैम में किया जाता है। इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय भक्त शामिल होते हैं। शोभायात्रा में माता रानी के विविध रूपों की झाँकियां भी शामिल की जाती हैं।

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