हादसे को न्यौता दे रहीं घनी आबादी में चल रहीं कबाड़ की दुकानें

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। शहर में घनी आबादी के बीच हो रहे कबाड़ के व्यवसाय से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। पिछले साल जनता नगर के पास मण्डला बायपास स्थित कबाड़ के गोदाम में भड़की आग से प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया दिखता है।

पिछले साल साहू कबाड़े का गोदाम शहर के बाहर आबादी क्षेत्र से दूर होने के कारण यहाँ आग लगने से कोई जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन शहर के बीच चल रहे कबाड़े में आग भड़कती है तो इससे जान और माल की हानि से इंकार नहीं किया जा सकता है।

दमकल का पहुँचना मुश्किल : शहर में जगह – जगह कबाड़े का व्यवसाय हो रहा है। यहाँ बड़ी तादाद में कबाड़ एकत्रित कर रखा जा रहा है। प्लास्टिक की बॉटलें, फायबर, टायर, लकड़ी, प्लास्टिक की कैन, कागज और खड्डे की रद्दी का बड़ी मात्रा में स्टाक कबाड़ व्यवसायी कर रहे हैं।

इसके अलावा कई जगह ऐसे स्थानों पर कबाड़ का व्यवसाय हो रहा है, जहाँ यदि आग भड़क जाये तो दमकल वाहन का घटना स्थल तक पहुँचना भी मुश्किल है। खास बात यह है कि इन कबाड़ दुकानों के आसपास लोग परिवार के साथ रह रहे हैं। आगजनी की घटना में उन्हें काफी नुकसान हो सकता है।

पिछले साल शहर के बाहर स्थित साहू कबाड़े के गोदाम में लगी आग को बुझाने में पाँच दमकलों से 40 बार पानी डाला गया था, तब जाकर आग पर काबू पाया गया था। ऐसे में शहर की संकरी गली में चल रहीं कबाड़ की दुकानों में आग लगती है, तो इस पर दमकल वाहन के बिना काबू पाना चुनौती भरा हो सकता है।

यहाँ हो रहा कबाड़ का व्यापार : शहर के गुरूनानक वार्ड, मंगलीपेठ, भगत सिंह वार्ड, दुर्गा चौक से एलआईबी चौक के बीच, बुधवारी तालाब के पास, दलसागर तालाब के पास भैरोगंज रोड, कटंगी रोड, नागपुर रोड आदि क्षेत्रों में कबाड़ का व्यवसाय हो रहा है।

इनमें से मंगलीपेठ, गुरूनानक वार्ड, बुधवारी तालाब के पास स्थित कबाड़ की दुकान ऐसी जगह चल रही हैं जहाँ संकरी गलियों के कारण दमकल वाहन पहुँचना बेहद मुश्किल हे। प्रशासन ने अब तक इन कबाड़ की दुकानों को शहरी सीमा से बाहर आबादी से दूर करने के लिये कोई कदम नहीं उठाये हैं।

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