अकारण बज रहे सिवनी में हूटर सायरन!

 

मुझे शिकायत उन वाहन चालकों से है जिनके द्वारा अकारण ही हूटर या सायरन का उपयोग किया जा रहा है।

गौर करने वाली बात यह है कि ज्यादातर सायरन एक सी ध्वनि ही लिये होते हैं इसके चलते वाहन चालक को पता ही नहीं चल पाता है कि पीछे से आने वाला वाहन कोई सरकारी अधिकारी का है अथवा किसी एंबूलेंस में कोई मरीज ले जाया जा रहा है।

कई मर्तबा तो देखने में यही आता है कि अकारण ही वाहनों में लगे हूटर का उपयोग किया जाता है। मामूली सा ट्रैफिक ज्यादा होने की स्थिति में भी वाहन चालक के द्वारा अपने वाहन के हूटर का बटन दबा दिया जाता है जिसके कारण कई वाहन चालकों में दहशत घर कर जाती है, ऐसे वाहन चालकों को कड़ी हिदायत दिये जाने की आवश्यकता है ताकि दहशत में कोई दुर्घटना न कारित हो जाये।

देखा जाये तो अकारण और जब-तब बजने वाले हूटर्स ने इनके महत्व को कम करके रख दिया है। स्थिति यह है कि आजकल शहरवासी ऐसे हूटर पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। हालांकि यह गलत तरीका ही है लेकिन जब इन हूटर्स का दुरूपयोग जिम्मेदारों के द्वारा नहीं रोका जायेगा तो ये हूटर भैंस के आगे बीन बजाने की तरह ही साबित होंगे और हो भी रहे हैं।

एंबूलेंस के कई चालकों के द्वारा भी कई मौकों पर खाली वाहन (बिना मरीज) में अकारण ही हूटर का उपयोग किया जाता है। ऐसी एंबूलेंस को जब साईड दे भी दी जाती है तो थोड़ा आगे जाने पर पता चलता है कि उक्त एंबूलेंस सड़क के किनारे खड़ी है और उसका चालक चाय-पान आदि करते हुए आराम फर्मा रहा है।

पुलिस के वाहन भी जब-तब हूटर बजाते ही यहाँ से वहाँ आते – जाते रहते हैं। लंबा अरसा हो गया होगा लोगों को पुलिस के वाहन का हॉर्न सुने हुए। वास्तविकता चाहे जो हो लेकिन वर्तमान में लोगों का यही सोचना है कि पुलिस के वाहन में हॉर्न का उपयोग बंद करते हुए सिर्फ हूटर ही लगाये गये हैं। अकारण हूटर बजाये जाने के कारण पुलिस के वाहन का मजाक तक सिवनी में उड़ाया जाने लगा है जिसे उचित नहीं कहा जा सकता है।

ये भी संभव है कि एंबूलेंस जैसे वाहन का चालन किसी अप्रशिक्षित चालक के द्वारा किया जा रहा हो जिसके द्वारा भीड़ देखकर घबराहट में ही हूटर का बटन दबा दिया जाता हो ताकि भीड़ हट सके और उसको वाहन चलाने में कोई दिक्कत न हो। बहरहाल कारण जो भी लेकिन बिना किसी आवश्यकता के हूटर या सायरन आदि बजाने पर लगाम लगाये जाने की आवश्यकता है।

कई अधिकारियों के वाहन भी ऐसे नजर आते हैं जिन्हें हूटर या बत्ती की पात्रता भी नहीं है लेकिन उनके द्वारा इनका जमकर उपयोग किया जा रहा है। संबंधित विभागों से अपेक्षा है कि उनके द्वारा हूटर या सायरन के उपयोग पर गंभीरता से ध्यान देते हुए इस मामले में उचित कार्यवाही की जायेगी।