हारा तो नहीं रहूंगा सिवनी में : मुंजारे

 

 

जिला ईकाई कमजोर, पिला दो जीत का टॉनिक

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। अगर हम चुनाव जीते तो निश्चित तौर पर महीने में 15 दिन सिवनी में और 15 दिन बालाघाट में गुजारेंगे, पर अगर जनता ने आर्शीवाद नहीं दिया तो हम सिवनी में नहीं रहेंगे। उक्ताशय की दो टूक बात बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के प्रत्याशी कंकर मुंजारे ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता के दौरान कही।

मुलताई के पूर्व विधायक डॉ.सुनीलम की उपस्थित में पत्रकार वार्ता के दौरान कंकर मुंजारे ने परिसीमन के उपरांत बालाघाट संसदीय क्षेत्र के संसद सदस्यों के द्वारा सिवनी जिले के साथ किये जाने वाले अन्याय पर कहा कि वे सिवनी के साथ अन्याय कतई नहीं होने देंगे।

उन्होंने कहा कि वे अगर जीते तो सिवनी के साथ अन्याय कतई नहीं होने देंगे। इसके लिये वे महीने में एक पखवाड़ा सिवनी में तो एक पखवाड़ा बालाघाट में निवास करेंगे। उनसे जब यह सवाल किया गया कि अगर उनकी आशा के अनुरूप परिणाम नहीं आये तो . . .! इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हारने के बाद वे सिवनी में नहीं रहेंगे।

कंकर मुंजारे के इस बयान पर मीडिया ने उन्हें जमकर घेरने की कोशिश भी की। पत्रकारों ने कंकर मुंजारे और डॉ.सुनीलम को सियासत में उनके पदार्पण के दौरान अपनाये गये तल्ख तेवरों को याद दिलाते हुए जिला ईकाईयों के कमजोर होने की बात कही तो डॉ.सुनीलम ने बेबाकी से इस बात को स्वीकार किया कि उनकी जिला ईकाई कमजोर है, इसे लोकसभा में टॉनिक पिला दें तो यह मजबूत हो जायेगी।

इस दौरान जब कंकर मुंजारे ने कहा कि एक मौका दिया जाये तो पत्रकारों ने इस पर भी सवाल करते हुए कहा कि क्या सिवनी के मतदाता हर बार प्रयोग करते रहेंगे! इसके पहले भी सांसदों के द्वारा एक मौका दिये जाने की बात की जाती रही है, पर जीत जाने के बाद सिवनी उनकी प्राथमिकता में पहली पायदान पर नहीं रहता है।

कंकर मुंजारे और डॉ.सुनीलम के द्वारा सिवनी की मॉडल रोड, जलावर्धन योजना, स्वास्थ्य सेवाओं आदि के बारे में भी काँग्रेस और भाजपा को जमकर घेरा गया। उन्होंने कहा कि सिवनी में सांसद, विधायकों और नेताओं के परिजन लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग में या तो प्रभारी सीएमएचओ रहे हैं या प्रभारी सिविल सर्जन!

नेता द्वय के द्वारा सिवनी जिल के मुद्दों को जिस बेबाकी और बारीकी के साथ रखा गया उसे देखकर लग रहा था कि कंकर मुंजारे और डॉ.सुनीलम के द्वारा जिले की समस्याओं के बारे में काफी विस्तार से अध्ययन किया गया है। सिवनी जिले की समस्याओं को लेकर पहली बार किसी प्रत्याशी के द्वारा इतना मुखर होकर पत्रकारों के बीच अपना पक्ष रखा गया है।

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