सीताफल के बाद अब तरबूज बन रहे छपारा की पहचान

 

 

(आनंद तिवारी)

छपारा (साई)। सिवनी जिले की पहचान एक समय में छपारा के नाम से ही होती थी। छपारा की पहचान लज़ीज सीताफल के रूप में भी सालों से होती आयी है। अब छपारा के तरबूज देश – प्रदेश में लोगों को भाने लगे हैं।

बैनगंगा तट के किनारे हो रही रसीले तरबूज की पैदावार के कारण छपारा का नाम अब महानगरों में पहचाना जाने लगा है। बड़ी तादाद में इस क्षेत्र के तरबूज आसपास के महानगरों के अलावा अन्य प्रदेशों में भी पहुँच रहे हैं। दूर दूर से व्यापारी यहाँ के तरबूज को खरीदने के लिये आ रहे हैं।

इस दशक के आरंभ में छपारा क्षेत्र में वर्ष 2011 से तरबूज की पैदावार बढ़ी है। शुरुआती दौर में कुछ किसानों ने बैनगंगा नदी के डूब क्षेत्र की सीमित जमीन में तरबूज की फसल लगायी थी। फसल अच्छी होने के बाद धीरे – धीरे अन्य किसानों ने भी तरबूज की फसल लगाना आरंभ कर दिया। क्षेत्र के बैनगंगा नदी तट के किनारे बसे देवरी, सादक सिवनी, माल्हनवाड़ा, सूआखेड़ा, सिमरिया, झिलमिली के लोग सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पर तरबूज की फसल लगा रहे हैं।

आमतौर पर छपारा बैनगंगा नदी के किनारे बसे गाँवों में किसान गेहूँ, मक्का, मूंगफली की परंपरागत खेती करते हैं, लेकिन कुछ वर्षों से तरबूज की खेती से उन किसानों को अच्छा खासा फायदा मिल रहा है जो बैनगंगा नदी के डूब क्षेत्र से जुड़ी जमीनों के आसपास बसे हैं। यहाँ पर बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती की जा रही है। इस सीजन में रोजाना सैकड़ों क्विंटल तरबूज क्षेत्र में हो जाता है।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि भाजपा शासन काल के दौरान छपारा में सीताफल की बंपर फसल को देखते हुए छपारा में सीताफल प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की बात कही गयी थी। इस संबंध में तत्कालीन विधायक रजनीश हरवंश सिंह और सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते के द्वारा ध्यान न दिये जाने से मामला ठण्डे बस्ते के हवाले ही हो गया था।

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