सड़क जाम करते हुए चलने में अपनी शान समझने लगे हैं लोग

 

मुझे शिकायत विवाह इत्यादि से संबंधित बारात या जुलूस आदि के उन आयोजकों से है जिनके द्वारा इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता है कि उनके जुलूस के कारण शहर का ट्रैफिक जाम हो रहा है।

वर्तमान में शादी-विवाह का सीजन तो चल ही रहा है साथ ही साथ लोकसभा चुनाव होने के कारण राजनीतिक माहौल भी गर्माया हुआ है जिसके कारण इन दिनों जुलूस आदि निकाले जा रहे हैं। इन आयोजनों के दौरान निकलने वाली बारात, रैली या जुलूस आदि में शामिल लोग कई मर्तबा पूरी सड़क घेरकर चलते हैं जिसके कारण अन्य लोगों को परेशानी होती है। ऐसी भीड़ में शामिल लोगों को इस बात की कतई परवाह नहीं रहती है कि वे अपनी खुद की खुशियों की खातिर किसी और की परेशानी का कारण बन रहे हैं।

हालांकि ऐसे ही कुछ आयोजनों में समझदार लोग भी शामिल होते हैं जो अपने ही लोगों को बार-बार इस बात के लिये निर्देशित करते रहते हैं कि वे किसी और की परेशानी का कारण न बनें। ऐसे सज्जन लोगों की समझदारी भरी सक्रियता और उनके निर्देशों का पालन करने के कारण एक ही मार्ग से रैली भी उसी समय निकल जाती है और उसी समय यातायात भी बिना किसी व्यवधान के जारी रहा करता है।

दरअसल जुलूस की शक्ल वाले आयोजनों में शामिल कई लोग यातायात को बाधित करने में अपनी शान समझ बैठते हैं और वे जान बूझकर इसे बाधित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। कृत्रिम रूप से बाधित किये गये यातायात के कारण कई बेकसूर लोगों को स्वास्थ्यगत समस्या के कारण इसकी भारी कीमत भी चुकाना पड़ती है लेकिन लोग हैं कि इस बात को समझना ही नहीं चाहते हैं उन्हें सिर्फ और सिर्फ अपनी खुशी से मतलब होता है। एक प्रकार से ऐसे लोग जो सड़क घेरकर चलते हुए साईड नहीं देना चाहते हैं वे किसी जानवर से कम नजर नहीं आते हैं।

आमतौर पर एंबुलेंस को रास्ता देने की अपील की जाती रही है लेकिन जरूरी नहीं कि चिकित्सा की आपात सेवा की दरकार सिर्फ एंबुलेंस में बैठे या लेटे व्यक्ति को ही हो! संभव है कि साईकिल से जा रहे किसी सामान्य गरीब को भी चिकित्सा की आपात सेवा की उतनी ही आवश्यकता हो जितनी एंबुलेंस या अन्य वाहनों में बैठे लोगों को होती है। इसलिये सड़क पर यातायात इस तरह का होना चाहिये ताकि किसी को भी परेशानी न हो।

ऐसी परिस्थितियों को कई बार रैली या जुलूस में शामिल लोग समझना ही नहीं चाहते हैं। आमतौर पर कई युवा अपनी ठसक बताते हुए सड़क को घेरकर चलने में अपनी तीरंदाजी बताने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। आश्चर्य तो तब होता है जब ऐसे आयोजनों में शामिल बुजुर्ग भी मूक दर्शक बनकर यातायात को बाधित होता हुआ देखते रहते हैं।

आवश्यकता इस बात की है कि महज यातायात को ही बाधित करने में लोगों के द्वारा अपनी ऊर्जा खपाने से बेहतर है कि उनके द्वारा व्यवस्था में सहयोग किया जाये। हालांकि यातायात विभाग के द्वारा इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिये कि सड़क पर यातायात अवरूद्ध न हो लेकिन ऐसा लगता है कि यातायात विभाग में लंबे समय से अकुशल लोगों की नियुक्ति किये जाने के कारण सिवनी की यातायात समस्या सुलझ नहीं पा रही है। सभी संबंधितों से अपेक्षा है कि वे सड़क पर यातायात को सुचारू रूप से जारी रखने के लिये आगे आकर पहल करेंगे।

अश्वनी डहेरिया