01 मई से शनिदेव हो जायेंगे वक्री

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। न्याय के देवता माने जाने वाले शनि देव के एक मई से वक्री होने के कारण सात राशियों के जातकों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है, जबकि पाँच राशि के जातकों के लिये यह परिवर्तन लाभप्रद होगा। ग्रहों के मंत्री मण्डल में शनि राजा हैं। इस कारण इस बार कुदृष्टि या शुभ प्रभाव ज्यादा होगा।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि ग्रह न्याय के देवता हैं। जिन राशि के जातकों पर प्रभावशाली ग्रह शनि की कुदृष्टि पड़ रही हो, उन्हें शनिवार व्रत के साथ शनि ग्रह को तेल अर्पित कर पूजा करनी चाहिये। शनि ग्रह शांति के लिये बजरंग बली की पूजा फलदायी होती है। शनि ग्रह केवल नुकसान नहीं पहुँचाते हैं, जिन राशियों पर शनि की दृष्टि अच्छी होती है, उनके लाभ के संयोग बनते हैं।

राशियों पर होगा ऐसा प्रभाव : शनि ग्रह की उल्टी चाल से मेष राशि के जातकों को शारीरिक कष्ट हो सकता है। वृष राशि वालों को हृदय से संबंधित विकार हो सकते हैं। मिथुन राशि के लिये स्थिति सामान्य रहेगी। कर्क राशि के जातकों के लिये यह परिवर्तन फायदेमंद साबित होगा।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सिंह राशि वालों को उदर विकार एवं कन्या राशि के जातकों को शत्रुओं से सावधान रहना होगा। तुला राशि के जातकों के विवाह में व्यवधान, कन्या राशि के लोगों को धन संबंधी से लेन देन से परेशानी हो सकती है। धनु राशि के जातकों के लिये शुभ प्रभाव होगा। मकर राशि के लोगों को रक्त संबंधी विकार हो सकता है। कुंभ राशि वालों के लिये लाभ एवं मीन राशि के जातकों के उन्नति के नये आयाम बनेंगे।

असंतुलित होगा मौसम : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि ग्रह के वक्री होने के कारण आंधी, तूफान, अतिवृष्टि या तपन हो सकती है। इसके पहले ही गुरु 22 अप्रैल सुबह 11.30 बजे से मंगल की राशि में जा चुके हैं। इतना ही नहीं वे भी 25 अप्रैल से वक्री भी हो गये हैं। इन परिवर्तनों के कारण धरती की ऊष्मा यानि गर्मी बढ़ेगी। शनि ग्रह मंगल की राशि में प्रवेश कर रहे हैं। ग्रहों के राजा शनि ओज के ग्रह मंगल की राशि में जायेंगे तो असहनीय गर्मी के योग बनेंगे। वहीं इन दोनों कारणों से राजनीतिक उथल – पुथल की स्थिति भी उत्पन्न होगी।

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