रोजगार देने में नाकाम हैं हुक्मरान!

 

 

केवलारी विधान सभा से साढ़े पाँच हजार मतदाता कर गये पलायन!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। जनपद पंचायत केवलारी की 78 ग्राम पंचायतों में 15 हजार 500 मतदाता पलायन कर गये थे। इनमें रोजगार, उच्च शिक्षा आदि के लिये मतदाताओं के पलायन की बात समाने आ रही है। जिला पंचायत की विज्ञप्ति को अगर सच माना जाये तो प्रदेश और केंद्र सरकारों के द्वारा जिले में रोजगार और उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के दावे बेमानी ही साबित हो रहे हैं।

जिला पंचायत के द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार जनपद पंचायत केवलारी के द्वारा लोकसभा निर्वाचन में मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिये ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सहायकों से डोर टू डोर सर्वे कराया गया था। इसमें प्रत्येक परिवार से वर्तमान में उपलब्ध मतदाताओं की संख्या को दर्ज किया जाकर पलायन करने वाले मतदाताओं की जानकारी प्राप्त की गयी थी।

विज्ञप्ति के अनुसार इस सर्वेक्षण में यह पता चला था कि जनपद पंचायत केवलारी की 78 ग्राम पंचायतों में 171 बूथ हैं जहाँ 01 लाख 16 हजार मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करना था। इनमें से 15 हजार 500 मतदाता पलायन कर गये थे। प्रत्येक सचिव को यह जिम्मेदारी दी गयी कि पलायन करने वाले मतदाताओं से दूरभाष पर संपर्क किया जाकर उन्हें मतदान तिथि पर आमंत्रित किया जाये।

विज्ञप्ति के अनुसार इस प्रक्रिया में यह देखा गया कि पलायन करने वाले मतदाताओं की जानकारी होने पर उन्हें मतदान दिवस पर बुलाया गया। जनपद पंचायत केवलारी की 78 ग्राम पंचायतों में पिछले लोकसभा चुनावों में 67 फीसदी मतदान हुआ था जो इस बार 85 प्रतिशत तक चला गया।

इस संबंध में जब जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं स्वीप प्रभारी श्रीमति मंजूषा विक्रांत राय से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ने चर्चा की। उनसे जब यह पूछा गया कि क्या रोजगार देने वाली सरकारी योजनाएं नाकाफी हैं जो इतनी बड़ी तादाद में लोगों के द्वारा पलायन किया गया है!

इसके जवाब में उन्होंने बताया कि पंचायतों के खाते में 11 जनवरी के बाद पैसा नहीं था। लोग आजीविका कमाने अन्य स्थानों पर चले गये होंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें पता चला कि अनेक लोग अन्य जिलों में रोजगार की तलाश में गये थे। इन पलायन कर गये लोगों को मतदान कराने के लिये, उन्हें बुलाने हेतु विशेष अभियान चलाया गया था।

जिला पंचायत सीईओ ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उनकी जानकारी में नरसिंहपुर की शुगर मिल में जिले के अनेक मजदूरों के काम करने की बात आने पर उनके द्वारा जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से इस मामले में चर्चा की गयी। जिला कलेक्टर के द्वारा नरसिंहपुर कलेक्टर और उनके स्वयं के द्वारा जिला पंचायत नरसिंहपुर के सीईओ से चर्चा कर इन मजदूरों को मतदान दिवस पर जिले में भेजने की अपील की गयी थी। इसके फलस्वरूप केवलारी में बंपर मतदान हुआ।

इस मामले में जब केवलारी के भाजपा विधायक राकेश पाल सिंह से चर्चा की गयी तो छूटते ही उन्होंने कहा कि प्रदेश की काँग्रेस सरकार का नियंत्रण सरकारी कर्मचारियों पर नहीं रह गया है। जिले में केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा स्थानीय स्तर पर रोजगार की अनेक योजनाएं चलायी जाती रही हैं।

विधायक राकेश पाल सिंह ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि उनके विधान सभा क्षेत्र में केवलारी जनपद पंचायत के 15 हजार 500 मतदाता कैसे पलायन कर गये। उन्होंने कहा कि इसके पहले ढाई दशक तक केवलारी में काँग्रेस के स्व.हरवंश सिंह और उसके बाद उनके पुत्र रजनीश हरवंश सिंह विधायक रहे।

युवा तुर्क विधायक राकेश पाल सिंह ने आगे कहा कि जिला पंचायत के दावे से साफ है कि पिता – पुत्र के द्वारा ढाई दशकों में केवलारी में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की ओर ध्यान ही नहीं दिया गया, जिससे इस तरह की पलायन की स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि इस सर्वे का आधार क्या रहा, इसमें शासन का कितना धन व्यय किया गया और मतदाताओं को किस तरह वापस बुलाया गया, इस बारे में जानकारी अवश्य लेंगे।

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