कलेक्टर के राडार पर आयीं स्वास्थ्य सेवाएं

 

 

24 बिस्तर वाले वार्ड में दिये 36 बिस्तर लगाने के निर्देश!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिले में पटरी से उतरती स्वास्थ्य सेवाओं को अब पुनः पटरी पर लाने के लिये जिला कलेक्टर संजीदा होते दिख रहे हैं। ब्रहस्पतिवार की शाम जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने के बाद शुक्रवार को स्वास्थ्य समिति की बैठक में स्वास्थ्य अधिकारियों को उन्होंने जमकर लताड़ लगायी।

जिला कलेक्टर कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि शुक्रवार 03 मई को जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा जिला अस्पताल सहित जिले भर की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अधिकारियों की बैठक ली गयी। बैठक में उनके द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिये एक माह का समय दिया गया है।

शुक्रवार को जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह ने जिला चिकित्सालय के गत दिवस किये गये अपने औचक निरीक्षण में गंदगी, बंद कूलर, पंखों एवं बिना पानी के वाटर कूलर तथा अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर सिविल सर्जन सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगायी।

कलेक्टर कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिला कलेक्टर के द्वारा जिला चिकित्सालय में प्रशासक पद पर पदस्थ मेजर अवस्थी को पद से हटाये जाने के निर्देश भी दिये। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जब यह बताया गया कि प्रशासक की नियुक्ति राज्य स्तर पर होती है तो उन्होंने कहा कि इन्हें हटाया जाकर वांछित अनुमोदन लिया जाये।

सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह कई बार हत्थे से उखड़ते भी नजर आये। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैये पर भी तल्ख नाराजगी व्यक्त करते हुए एक माह के अंदर व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के निर्देश उन्होंने दिये।

सूत्रों की मानें तो जिला कलेक्टर के द्वारा स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि मरीजों और उनके परिजनों को मूलभूत सुविधाएं एक माह के अंदर मिलना आरंभ हो जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि शासन के द्वारा निर्धारित समय पर चिकित्सक ओपीडी में बैठें और मरीजों को देखें। यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि जिला अस्पताल में शाम की पाली में चिकित्सक ओपीडी में बैठते ही नहीं हैं।

सूत्रों ने यह भी बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं सिविल सर्जन सहित समस्त बीएमओ के द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही न करने पर अधिकारियों को लताड़ लगाते हुए कहा गया कि स्वास्थ्य विभाग में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कैसे किया जा सकता है, इस बारे में ठोस कार्ययोजना बनायी जाकर काम किया जाये।

सूत्रों ने यह भी बताया कि जिला कलेक्टर के द्वारा मरीजों को वार्ड में नीचे लिटाये जाने पर भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा गया कि वार्ड में 24 पलंग हैं तो वहाँ 36 पलंग लगाये जायें। बैठक के उपरांत स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी यह भी चर्चा करते नजर आये कि अगर ऐसा किया जाता है तो 400 बिस्तर वाला अस्पताल अघोषित रूप से 700 बेड का हो जायेगा!

सूत्रों ने बताया कि चिकित्सकों के बीच यह भी चर्चा चलती रही कि अस्पताल का संचालन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, स्वास्थ्य संचालनालय के द्वारा दिये गये दिशा निर्देशों के हिसाब से होता है। सीएस या सीएमएचओ चाहकर भी निर्धारित से एक बिस्तर अधिक नहीं बढ़ा सकते हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों की तादाद बढ़ने पर फर्श पर गद्दे लगवाये जा सकते हैं।

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