जलसंकट पर किसी का ध्यान नहीं!

 

 

(शरद खरे)

मई का पहला सप्ताह होने पर है। शहर में पानी की मारामारी जमकर हो रही है। आये दिन किसी न किसी मोहल्ले में पानी के संकट से लोग दो-चार हो रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी शासित नगर पालिका परिषद के चुने हुए प्रतिनिधि इस मामले में मौन हैं, मानो शहर में सब कुछ ठीक-ठाक है।

नब्बे के दशक में सिवनी शहर की प्यास बुझाने के लिये भीमगढ़ जलावर्धन योजना का आगाज़ वर्ष 2024 की आबादी का अनुमान लगाकर किया गया था। इस योजना से किसी भी माह में तीसों दिन पानी नहीं मिल पाया है। हर महीने बीच के कुछ दिनों में पानी की आपूर्ति बाधित होती ही रही है।

भीमगढ़ जलावर्धन योजना में जमकर भ्रष्टाचार हुआ था। यह योजना अभी आधे समय तक ही अपनी सेवाएं दे पायी थी कि अचानक ही वर्ष 2013 में भीमगढ़ जलावर्धन योजना की पूरक जलावर्धन योजना जिसे नवीन जलावर्धन योजना भी कहा जा रहा है का श्रीगणेश कर दिया गया।

नवीन जलावर्धन योजना के ठेकेदार का इकबाल सियासी हल्कों में इस कदर बुलंद है कि ठेकेदार के द्वारा इसके लिये उसे दी गयी समयावधि के पाँच साल बीतने के बाद भी अब तक इस योजना का काम पूरा नहीं किया गया है। आज तक एक बूंद पानी भी इस योजना के जरिये लोगों को नहीं मिल पाया है, अगर मिला भी हो तो पालिका के द्वारा इस मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं की गयी है।

चार साल बीत गये, अब यह पाँचवी गर्मी है जबकि शहर के निवासी पानी के लिये तरस रहे हैं। उधर, 62 करोड़ 55 लाख रूपये (मूलतः 48 करोड़ रूपये की) की इस योजना में ठेकेदार 60 करोड़ रूपये की राशि लेकर ठाठ से बैठा लोगों को मुँह चिढ़ा रहा है। भाजपा शासित नगर पालिका भी ठेकेदार की देहरी पर कत्थक करती दिख रही है।

ऐसा कहने के पीछे कारण महज इतना है कि ठेकेदार को किन परिस्थितियों में पाँच साल तक की समयावधि की छूट प्रदाय की गयी? ठेकेदार को 60 करोड़ रूपये देने के बाद भी अब तक उसके द्वारा शहर में पानी की सप्लाई आरंभ क्यों नहीं की गयी?

जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा दिये गये अल्टीमेटम से 65 दिन एवं तत्कालीन निर्दलीय एवं वर्तमान भाजपा विधायक दिनेश राय के द्वारा तय की गयी समय सीमा से 431 दिन ज्यादा हो गये हैं, उसके बाद भी इस योजना पर पालिका ने अपना मौन नहीं तोड़ा है।

इस तरह के अनेक प्रश्न हैं जो आज भी अनुत्तरित ही दिख रहे हैं। इन प्रश्नों का जवाब माँगने का साहस भाजपा और काँग्रेस के चुने हुए प्रतिनिधियों के द्वारा न किया जाना आश्चर्यजनक ही माना जायेगा। और तो और निर्दलीय विधायक रहे दिनेश राय अब भाजपा के सदस्य बन चुके हैं, उनके द्वारा भी इस मामले में मौन ही धारण करके रखा गया है।

जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह को अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर फरवरी माह में इस योजना के काम को देखने के लिये आधा दर्जन से ज्यादा बार भीमगढ़ से लेकर बबरिया तक एक करना पड़ा था। यह निश्चित तौर पर भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के लिये शर्मनाक बात मानी जा सकती है, क्योंकि जिस काम को पालिका के नुमाईंदों को करना चाहिये था उसके लिये कलेक्टर को पहल करना पड़ा!

इस साल के अंत में स्थानीय निकाय के चुनाव भी होने हैं, इसके बाद भी पालिका में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष में बैठी काँग्रेस को इस बात की परवाह नहीं दिख रही है। दोनों ही दलों के मौन से तो कम से कम यही प्रतीत हो रहा है। जिला कलेक्टर के द्वारा तय समय सीमा की भी पालिका और ठेकेदार को परवाह नहीं रह गयी है तो अब आम जनता उम्मीद करे भी तो किससे!

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