डीजे के शोर में असहाय दिखते एंबूलेंस, फायर ब्रिगेड जैसे वाहन

इस स्तंभ के माध्यम से मैं शादी विवाह या किसी शोभा यात्रा, जुलूस आदि के आयोजकों से अपील करना चाहता हूँ कि उनके द्वारा सड़क पर ऐसे आयोजनों के साथ निकलते समय डीजे के वॉल्यूम के साथ ही साथ यातायात पर भी ध्यान दिया जाये।

दरअसल अधिकांश मौकों पर सिवनी में यह देखने में आ रहा है कि जब किसी जुलूस की शक्ल में कोई बारात या जुलूस निकलता है उस दौरान उसमें शामिल लोगों के द्वारा डीजे का बेजा इस्तेमाल किया जाता है। डीजे के शोर में यातायात में क्या बाधाएं उस जुलूस के कारण उत्पन्न हो रही हैं इस ओर किसी का ध्यान नहीं दिया जाता है।

कई मौकों पर एंबूलेंस जैसे वाहन इस शोरगुल के कारण हॉर्न और हूटर बजाते रह जाते हैं लेकिन उसे सुनने वाला उस भीड़ में कोई नहीं होता है जिसके कारण लंबे समय तक ऐसे आवश्यक वाहन जगह पर ही खड़े रह जाते हैं जिसमें गंभीर मरीज उपचार पाने के लिये तड़फते रहते हैं।

ऐसा भी नहीं है कि भीड़ में शामिल एंबूलेंस को देखकर उसके लिये रास्ता बनाने का कोई जतन नहीं करते हैं लेकिन उनके द्वारा जब तक रास्ता बनाने के प्रयास आरंभ किये जाते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। फायर ब्रिगेड जैसे वाहन जिन्हें मौके पर पहुँचने की जल्दी होती है वे भी खड़े के खड़े ही रह जाते हैं और जिस स्थान पर आग लगी हुई होती है वह संबंधित का पूरा नुकसान कर चुकी होती है।

ऐसे में आयोजकों को इस बात पर विचार अवश्य करना चाहिये कि उनकी खुशी के पल, किसी अन्य के लिये गम का कारण न बन सके, कोई परेशानी में उलझ सके। इसके लिये आवश्यक होगा कि सड़क पर जुलूस आदि निकालते समय यातायात पर पूरा ध्यान रखा जाये। इस दौरान जैसे ही कोई एंबूलेंस या अग्निशामक वाहन दिखायी दे वैसे ही साथ में चल रहे डीजे को अल्प समय के लिये बंद करवा दिया जाये।

कुछ समय के लिये डीजे को बंद करवाने का सबसे अच्छा परिणाम यही मिलेगा कि उस दौरान लोग ऐसे वाहनों का सायरन सहज ही सुन सकेंगे, जिसके बाद वे स्वतः ही रास्ता बनाकर दे देंगे और आवश्यक सेवा में जा रहे वाहन अपने गंतव्य पर समय पर पहुँच सकेंगे। वास्तव में इस संबंध में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है जिसके लिये कुछ लोगों को आगे आकर पहल करना होगा।

अभिषेक सिंह परिहार