श्रीलंका ने कीमत चुकाई

 

 

पूर्व सैन्य कमांडर फील्ड मार्शल सरथ फोंसेका ने श्रीलंका में वर्तमान सुरक्षा हालात पर जो टिप्पणी की है, वह काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने संसदीय बहस के दौरान आईएस, नेशनल तौहीद जमात और लिट्टे की परस्पर तुलना भी पेश की है। उन्होंने न केवल कुछ जरूरी घरेलू सच उजागर किए, बल्कि विपक्ष से भी कहा कि वह नए तरह के आतंकवाद का मुकाबला करने में सरकार की मदद करे।

उन्होंने रक्षा प्रतिष्ठान की कमियों की ओर भी इशारा किया है। श्रीलंका लिट्टे को सफलतापूर्वक समाप्त कर चुका है और ठीक इसी तरह नेशनल तौहीद जमात को भी समाप्त कर दिया जाएगा। आईएस का एजेंडा दूसरे आतंकी संगठनों की तुलना में बहुत व्यापक है। आईएस पूरी दुनिया में सेकुलर शासन के विरुद्ध मुस्लिमों का धु्रवीकरण कर रहा है। वह पूरी दुनिया में मुस्लिम आबादी के बीच स्वयं को सामरिक, राजनीतिक, धार्मिक सत्ता बनाना चाहता है। उसका अंतिम लक्ष्य शरीयत द्वारा संचालित सुन्नी इस्लामी राज्य की स्थापना है। लिट्टे और आईएस में इस अर्थ में समानता है कि लिट्टे लड़कर जमीन के बडे़ हिस्से पर नियंत्रण चाहता था और आईएस भी ऐसा ही चाहता है।

बहरहाल, नेशनल तौहीद जमात या आईएस में ऐसी क्षमता नहीं है कि वह किसी जमीन पर कब्जा जमा ले। ये संगठन केवल आतंकी हमले करते हुए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहते हैं। आईएस का अंत उतना आसान नहीं, लेकिन नेशनल तौहीद जमात को समाप्त करना आसान है। सुन जु ने अपनी किताब द आर्ट ऑफ वार में लिखा है, यदि कोई स्वयं को और अपने शत्रु को जानता है, तो उसे सैकड़ों लड़ाइयों के नतीजे से डरने की जरूरत नहीं है।

यदि कोई स्वयं को जानता है, लेकिन शत्रु को नहीं जानता, तो उसकी हर जीत में भी हार का दर्द होगा। यदि कोई न स्वयं को जानता है और न अपने शत्रु को, तो वह हर लड़ाई में हारेगा। एक देश के रूप में श्रीलंका को अपने शत्रुओं को जानने के लिए खुफिया तंत्र से किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए। श्रीलंका ने सियासी कारणों से राज्य के खुफिया तंत्र को कमजोर करने की कीमत चुकाई है। (द आइसलैंड, श्रीलंका से साभार)

(साई फीचर्स)

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