भावांतर की राशि के लिये भटक रहे किसान

 

(फैयाज खान)

छपारा (साई)। सरकारों के द्वारा किसानों के हित को साधने के लिये अनेक योजनाएं चलायी जा रही हैं। इसके बाद भी किसानों को इन योजनाओं का लाभ पाने के लिये यत्र-तत्र भटकने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

छपारा तहसील अंतर्गत आने वाले बिछुआ और बर्रा ग्राम पंचायत के 40 किसानों के खाते में भावांतर की राशि नहीं मिलने से लोग तहसील और मण्डी के चक्कर लगा रहे हैं। अपनी शिकायत में सुमेर सिंह राजपूत, गोपाल सिंह राजपूत, मनोहर सिंह राजपूत, नन्ही बाई, शारदा बाई, खरक सिंह ऐसे लगभग तीन दर्जन से भी ज्यादा किसानों ने बताया कि बर्रा बिछुआ ग्राम हल्का पटवारी नंबर 40.2 एवं 43.2 के सभी किसानों की भूमि पर उनके द्वारा मक्का की फसल बोयी गयी थी।

उन्होंने बताया कि मक्का के विक्रय पंजीयन कराते हुए मक्का को कृषि उपज मण्डी पर रजिस्ट्रेशन तथा शासन के नियमों के आधार पर विक्रय भी किया गया था। संबंधित हल्का पटवारी के द्वारा समुचित रूप से उक्त कृषकों की कृषि भूमि की गिरदावरी ऑन लाईन रिकॉर्ड में अपडेट नहीं करायी गयी है।

उन्होंने बताया कि संबंधित हल्का पटवारी के रिकॉर्ड रजिस्टर जिसमें वह मौके पर जाकर उन्होंने जो निरीक्षण के पश्चात तैयार किया जाता है, उस पर स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि सभी किसानों ने अपने कृषि भूमि पर मक्का लगाया था। पटवारी के द्वारा ऑनलाईन अपडेटशन न करा पाने से सभी कृषकों को मिलने वाली भावांतर की राशि से वंचित होना पड़ रहा है।

मण्डी के सचिव आर.पी. बहेलिया से जब इस विषय में चर्चा की गयी तो उन्होंने बताया कि इसमें मण्डी की तरफ से कोई भी चूक नहीं हुई है। यदि संबंधित पटवारी ने गिरदावली करने के बाद ऑनलाईन नहीं चढ़ाया तो यह राजस्व विभाग की गलती है। हालांकि यह तकनीकी गलती ठीक होते ही इन किसानों को भी भावांतर की राशि का भुगतान मिल जायेगा।

40 किसानों का मामला मेरे संज्ञान में आया है. संबंधित हल्का पटवारी के अस्वस्थ्य रहने से शायद यह ऑनलाईन अपडेशन नहीं हो पाया था. इस विषय पर कलेक्टर से भी चर्चा की गयी तो उन्होंने भी कहा कि जितने भी किसानों को भावांतर की राशि नहीं मिली है, उसकी सूची बनाकर दो. जल्द ही इनका निराकरण करके आदर्श आचार संहिता के बाद इनका भुगतान हो जायेगा.

नितिन गोंड़,

तहसीलदार छपारा.