प्रदेश में 10 वीं के परीक्षा पैटर्न में बदलाव की तैयारी

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की बोर्ड परीक्षा में प्रदेशभर में 12वीं कक्षा में 91 हजार 112 तो 10वीं में 3 लाख 87 हजार 817 परीक्षार्थी फेल हुए हैं। दोनों परीक्षाओं में 4 लाख 78 हजार 929 विद्यार्थी फेल हो गए हैं। इतनी ज्यादा संख्या में परीक्षार्थियों के फेल होने को माशिमं ने गंभीरता से लिया है।

माशिमं अब परीक्षा पैटर्न, प्रश्न पत्र और रिजल्ट का रिव्यू कराएगा। वहीं 10वीं में नई व्यवस्था लागू करने की विचार किया जा रहा है। इसमें सीबीएसई की तर्ज पर परीक्षा में वैकल्पिक प्रश्नों की संख्या कम कर सब्जेक्टिव प्रश्नों की संख्या बढ़ाई जाएगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि छात्रों की लिखने-पढ़ने की स्किल, प्रैक्टिकल नॉलेज और सोचने समझने की क्षमता को बढ़ाया जा सके।

माशिमं के सचिव अजय सिंह गंगवार ने बताया कि माशिमं नया प्रयोग करने जा रहा है। इस बदलाव के बाद नए पैटर्न के सैंपल जारी किए जाएंगे। ताकि, छात्र नए पैटर्न को समझ सकें और लिखने-पढ़ने की स्किल बढ़ा सकें। वहीं प्रश्न पत्रों में प्रश्नों की संख्या कम कर प्रत्येक प्रश्न के नंबर बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।

यह सब अगले शिक्षण सत्र से लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि छात्रों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पूरे प्रश्न पत्र को नहीं बदला जा रहा है, मामूली सा बदलाव किया जा रहा है।

लोक शिक्षण संचालनालय को भेजा जाएगा सुधार के लिए सुझाव : परीक्षा पैटर्न, प्रश्न पत्र और रिजल्ट का रिव्यू करने के बाद माशिमं सुझाव बनाकर लोक शिक्षण संचालनालय को भेजेगा। इसमें किस विषय पर ज्यादा फोकस करना है, यह भी बताया जाएगा। ताकि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इन विषयों पर फोकस किया जा सके।

बता दें कि वर्तमान में विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव, शिक्षकों की बीएलओ में ड्यूटी और शिक्षकों की लगातार कमी के चलते 10वीं का रिजल्ट खराब आया है। प्रदेश में अंग्रेजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री के शिक्षकों की संख्या कम है। लिहाजा, इन विषयों में सबसे ज्यादा परीक्षार्थी फेल हुए हैं।

फेल छात्रों को रुक जाना नहीं योजना का दिया जाएगा लाभ : इधर, बड़ी संख्या में फेल होने वाले छात्रों को रुक जाना नहीं योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत विद्यार्थी जिन विषयों में फेल हुए हैं, उसकी दोबारा परीक्षा देकर पास हो सकते हैं। इससे उनका एक साल बर्बाद होने से बचाया जा सकता है। वहीं छात्रों को दो विषयों में सप्लीमेंट्री दी गई है। इन विषयों की परीक्षा जुलाई माह में होगी। जिसके बाद फाइनल रिजल्ट जारी होगा।

प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य होने की तरह ही प्रदेश में 12वीं तक शिक्षा अनिवार्य होना चाहिए। इससे कई ऐसे छात्र जो फेल होने के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं, वे कम से कम 12वीं तक पढ़ पाएंगे। माशिमं फेल हुए छात्रों की संख्या को देखते हुए समीक्षा करा रहा है।

अजय सिंह गंगवार,

सचिव, माशिमं.

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