विमला बुआ को दी नम आँखों से अंतिम बिदाई

 

 

(अय्यूब कुुुरैशी)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले में निष्पक्ष, निर्भीक, दबंग और जिले के हित में उठने वाली आवाज सदा के लिये शांत हो गयी। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा ने ब्रहस्पतिवार और शुक्रवार की दरमियानी रात में जिला अस्पताल में अंतिम साँस ली। शुक्रवार 17 मईकी शाम उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम बिदाई दी गयी।

इस साल 01 जुलाई को वे अपने 90 वर्ष पूरे करने वालीं थीं। उमरदराज लोगों के बीच दीदी या बाई के नाम से एवं प्रौढ़ हो रही पीढ़ी के बीच बुआ के नाम से पहचानी जाने वालीं सुश्री विमला वर्मा कुछ समय से अस्वस्थ्य चल रहीं थीं। गुरूवार 16 मई को शाम चार बजे के आसपास उन्हें असहज महसूस हुआ था।

रात लगभग सवा दस बजे उन्हें निजि एंबुलेंस के जरिये जिला अस्पताल की गहन चिकित्सा ईकाई में दाखिल करवाया गया था। रात लगभग साढ़े बारह बजे उन्होंने अंतिम साँस ली। रात को ही उनके पार्थिव शरीर को उनके निज निवास गिरधर भवन ले जाया गया। रात में ही सोशल मीडिया पर विमला वर्मा को श्रृद्धा सुमन अर्पित करने का सिलसिला आरंभ हुआ जो अब तक जारी है।

उनका जन्म 01 जुलाई 1929 को महाराष्ट्र प्रांत के नागपुर में हुआ था। उन्होंने एमए बीटी तक शिक्षा ग्रहण की थी। कम ही लोग जानते हैं कि सुश्री विमला वर्मा ने सिवनी के सबसे पहले खुले शिखरचंद जैन महाविद्यालय में अध्यापन का काम भी किया था। सुश्री विमला वर्मा की गिनती कुशल प्रशासक के रूप में की जाती थी।

सुश्री विमला वर्मा नेे 1963 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। वे 1963 से 1967 तक जिला काँग्रेस कमेटी की अध्यक्ष भी रहीं। 1967 में उन्हें काँग्रेस के द्वारा पहली बार केवलारी विधान सभा से टिकिट दी गयी, जहाँ उन्होंने काँग्रेस का ऐसा परचम लहराया कि 1990 तक वे इस विधान सभा क्षेत्र की अजेय योद्धा बनी रहीं।

प्रौढ़ हो रही पीढ़ी इस बात की गवाह है कि सुश्री विमला वर्मा के द्वारा ईमानदारी के साथ मूल्य परख सियासत को तवज्जो दी गयी और उनके नपे तुले कदमों का ही परिणाम था कि वे प्रदेश में स्वास्थ्य, सिंचाई, ऊर्जा आदि अनेक विभागों की कैबिनेट मंत्री रहीं। इस दौरान उनके द्वारा सिवनी जिले के विकास के द्वार खोलने के हर संभव प्रयास किये गये।

सिवनी में जिला अस्पताल, दूध डेयरी, सिंचाई विभाग का मुख्य अभियंता कार्यालय, लोक निर्माण विभाग का अधीक्षण अभियंता कार्यालय, राष्ट्रीय राजमार्ग का कार्यपालन यंत्री कार्यालय, केवलारी का डाईट, कान्हीवाड़ा का नवोदय विद्यालय आदि न जाने कितनी उपलब्धियां उनके खाते में जुड़ी हुईं हैं।

शाम लगभग साढ़े पाँच बजे उनके निवास गिरधर भवन से राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा नेहरू रोड होते हुए कटंगी नाका मोक्षधाम ले जाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें अंतिम बिदाई दी। विधान सभा उपाध्यक्ष सुश्री हिना कांवरे, केवलारी विधायक राकेश पाल सिंह, निर्वतमान सांसद प्रहलाद सिंह पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते, पूर्व मंत्री गौरी शंकर बिसेन, पूर्व विधायक कमल मर्सकोले, रजनीश सिंह आदि ने उन्हें अंतिम बिदाई दी।