स्पीड ब्रेकर वाला शहर!

 

मुझे शिकायत उस व्यवस्था से है जिसके तहत सिवनी को अब स्पीड ब्रेकर वाले शहर के रूप में भी जाना जाने लगा है।

गौरतलब होगा कि सिवनी की अत्यंत संकरी सड़कों पर यातायात का इतना भारी दबाव रहता है कि उस पर किसी भी वाहन के तेज गति से चलना संभव नहीं होता है। इसके बावजूद यहाँ की सड़कों पर जगह-जगह स्पीड ब्रेकर बनाये जाने का कोई औचित्य समझ में नहीं आता है।

शहर के कुछ वार्ड तो ऐसे हैं जहाँ स्पीड ब्रेकर के कारण पैदल चलना भी दूभर हो रहा है। सुनारी मोहल्ला, विवेकानंद वार्ड जैसे स्थान ऐसे हैं जहाँ सड़क पर जगह-जगह स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। मजे की बात यह है कि सिवनी की सड़कों पर स्पीड ब्रेकर तो बनवा दिये जाते हैं लेकिन इनको बनाये जाते समय निर्धारित मानकों को कतई ध्यान नहीं रखा जाता है जिसके कारण ये वाहन चालकों के लिये परेशानी का सबब ही बने हुए हैं।

नियमाुनसार जहाँ भी गति अवरोधक बनाया जाता है उसके पहले सूचना फलक के माध्यम से वाहन चालकों को आगाह कर दिया जाता है कि आगे गति अवरोधक है लेकिन सिवनी शहर में शायद ही कोई स्थान हो जहाँ स्पीड ब्रेकर की सूचना देने वाले कोई बोर्ड लगाये गये हों। यही नहीं बल्कि इन ब्रेकर्स पर कायदे से रेडियम पेंट से लाईनिंग भी की जाना चाहिये जो कहीं दिखायी नहीं देती है।

सिवनी की संकरी सड़कों को चौड़ा करने की दिशा में कोई पहल करता नजर नहीं आ जरा है जबकि इसकी महती आवश्यकता आज नहीं बल्कि आज से लगभग पंद्रह साल पहले से बनी हुई है। इसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिवनी के जन प्रतिनिधि सिवनी के यातायात को लेकर कितना गंभीर हैं। अभी एक मौका आया था जबकि मिशन स्कूल के समीप गणेश चौक से लेकर कटंगी रोड तक चौड़ीकरण किया जा सकता था लेकिन अतिक्रमण हटाने में प्रशासन को पसीना आ गया जिसका नतीजा यह निकला कि शहरवासी आज भी पुरानी संकरी रोड पर ही आवागमन करने को मजबूर हैं और ऊपर से इस मार्ग पर भी स्पीड ब्रेकर का निर्माण जगह-जगह करवा दिया गया है।

रेंगते हुए यातायात के मध्य स्पीड ब्रेकर बनवाये जाने की मानसिकता किसी के गले नहीं उतरती है जबकि सड़कों पर गड्ढे भी ऐसे हैं जो वाहन चालकों की रफ्तार पर वैसे भी अंकुश लगाये रखते हैं। कायदे से सिवनी की सड़कों से तब तक स्पीड ब्रेकर को हटा दिया जाना चाहिये जब तक कि उन सड़कों को चौड़ा नहीं किया जाता है। यदि किन्हीं स्थानों पर स्पीड ब्रेकर की आवश्यकता है भी तो उन्हें निर्धारित मानकों के आधार पर ही बनाया जाना चाहिये।

इंतखाब आलम

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