वाहनों की नंबर प्लेट पर नंबर छोड़कर है सब कुछ

 

इस स्तंभ के माध्यम से मैं यातायात और परिवहन जैसे विभागों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ कि सिवनी में इन दिनों सड़कों पर दौड़ रहे कई वाहनों की नंबर प्लेट से नंबर नदारद हैं और इनके स्थान पर अन्य स्लोगन या चित्रकारी करवा दी गयी है।

ऐसे वाहनों से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को तब होती है जब इन वाहनों पर सवार किसी के द्वारा महिलाओं के साथ छींटाकशी या छेड़छाड़ की घटना को अंजाम दे दिया जाता है। वाहन में नंबर न होने के कारण ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों का पता लगाया जाना आसान नहीं रह जाता है।

वैसे भी शहर में इन दिनों जिस वाहन को भी देखा जाये उनमें से ज्यादातर में या तो प्रेस लिखा हुआ होता है और या फिर पुलिस। ऐसे कई वाहन यातायात में जमकर बाधा उत्पन्न करते सहज ही देखे जा सकते हैं। सड़क पर ऐसे वाहन आड़े-तिरछे खड़े कर दिये जाते हैं जिन पर यातायात पुलिस भी कार्यवाही करने से बचती दिखती है। कई बार तो कोतवाली पुलिस का गश्ती वाहन भी सड़कों पर बेवजह ही खड़ा दिख जाता है जिससे यातायात प्रभावित हुए बिना नहीं रहता है।

पुलिस या प्रेस लिखे ऐसे वाहन पार्किंग स्थल का उपयोग करते हुए शायद ही देखे जाते हों। ये वाहन रॉन्ग साईड चलने से भी बाज नहीं आते हैं। शुक्रवारी हो या बुधवारी हो और या फिर बाहुबली चौराहा जैसे स्थल हों, यहाँ पर प्रेस या पुलिस लिखे वाहनों को सड़क पर ही खड़े होते हुए देखे जा सकते हैं। इन वाहनों के कारण जाम के जैसी स्थिति भी निर्मित होती रहती है और ये सब होता हुआ वाहन मालिक देखते रहते हैं लेकिन अपनी ठसक बताते हुए ये वाहन चालक निहायत ही बेशर्मी के साथ अपने वाहनों को टस से मस नहीं करते हैं। बताया तो यहाँ तक जाता है कि कई वाहन सिवनी में ऐसे चल रहे हैं जो न तो प्रेस से जुड़े हुए लोगों के होते हैं और न ही पुलिस विभाग से इनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना होता है।

ऐसे में आवश्यक हो जाता है कि इस बात की जाँच की जाये कि कितने वाहनों में प्रेस या पुलिस लिखा जाना जायज है। कहीं ऐसा लिखवाकर वाहन चालक किसी अनैतिक कार्यों में तो खुद को लिप्त नहीं रखे हुए हैं। यदि प्रेस या पुलिस लिखवाया जाना इतना ही आवश्यक है तो कायदे से वह नंबर प्लेट पर नहीं लिखा होना चाहिये। संबंधित विभागों को इस दिशा में कड़ाई के साथ कार्यवाही करना चाहिये कि वाहनों की नंबर प्लेट पर सिर्फ और सिर्फ नंबर ही निर्धारित मापदण्ड के अनुसार अंकित किये गये हों।

पुलिस के द्वारा ऐसे वाहनों की जाँच अवश्य की जाना चाहिये कि प्रेस या पुलिस लिखे कितने वाहन अकारण ही ऐसा लिखवाकर शहर में घूम रहे हैं। ऐसे अवैध वाहनों को संदेह की नजर से देखते हुए उनकी जाँच की जाना चाहिये कि वे यदि मीडिया या पुलिस से जुड़े हुए नहीं हैं तो फिर क्या कारण है कि उन वाहनों पर प्रेस या पुलिस लिखवाया गया है। संभव है कि यदि इस दिशा में गंभीरता के साथ कार्यवाही की जाये तो कुछ अनसुलझे मामले भी सुलझाये जा सकते हैं।

सुमित श्रीवास्तव

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