आज से रातें हो सकती हैं गर्म!

 

 

दिन में तमतमाने लगा सूरज

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। नौ पता के पहले ही सूर्यनाराण के तेवर तल्ख होते जा रहे हैं। लगातार दूसरे दिन भी तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

भीषण गर्मी का दौर फिर से आरंभ हो गया है। इस सीजन का सबसे गर्म दिन बुधवार 22 मई के बाद गुरूवार 23 मई को भी बीता। गुरूवार को तापमान एक बार फिर बुधवार की तरह ही 43.2 डिग्री सेल्सियस रहा। लोग जितनी देर के लिये भी धूप में निकले उन्हें गर्म लपट का अहसास हुआ।

मौसम विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि बुधवार को रात में भी जबर्दस्त गर्मी का अहसास हुआ। सूत्रों की मानें तो आने वाले दो दिनों तक रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है।

ज्ञातव्य है कि 25 मई से नौतपा के दिन आरंभ हो जायेंगे। मौसम विभाग के द्वारा पहले ही इस संबंध में एलर्ट जारी कर सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले चौबीस घण्टे के दौरान भी आसमान पूरी तरह साफ रहेगा और तेज धूप में लोगों का रहना मुश्किल होगा।

आज भी बढ़ेगा पारा : मौसम विभाग  ने आने वाले दिनों में पारे के इसी रफ्तार से बढ़ने की आशंका जतायी है। विभाग का कहना है कि यही रफ्तार रही तो आने वाले दिनों में पारा 44 डिग्री सेल्सियस के भी पार जा सकता है। इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों को इस गर्मी में सावधानी बरतने के लिये एडवाइज़री जारी की है। विभाग ने बहुत जरूरी होने पर ही लोगों को दिन में बाहर निकलने की सलाह दी है।

चिकित्सकों के मुताबिक 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक पारा होने पर लोगों को लू लगने की समस्या ज्यादा आती है। इस कारण डिहाईड्रेशन होता है। पसीना निकलने से शरीर में नमक की कमी हो जाती है। ब्लड सर्कुलेशन कम होता है। व्यक्ति को कमजोरी लगती है, चक्कर आते हैं, उल्टी जैसा लगता है।

चिकित्सकों की मानें तो कई बार बेहोशी भी छा जाती है। कई लोगों को नकसीर होने के कारण नाक से खून भी आता है। समय पर यदि उपचार नहीं लिया गया तो हीट स्ट्रोक (ताप ज्वर) भी हो सकता है। इसमें आदमी अक्सर बेहोश हो जाता है। ताप ज्वर की स्थिति में मरीज का पहला उपचार यह है कि उसे ठण्डे पानी से नहलाया जाये।

गर्मी में इन बातों का रखें ध्यान : पानी ज्यादा पीयें, जूस – शरबत का सेवन ज्यादा करें। सफेद व हल्के रंग के कपड़े पहनें। टाईट कपड़ों की बजाय ढीले कपड़े पहनें। जो मार्केटिंग का काम करते हैं और उन्हें धूप में रहना पड़ता है, इस दौरान उन्हें थोड़ी – थोड़ी देर में छाँव में आना चाहिये।