गीदड़ भभकी की हुई मियाद पूरी

 

 

हर बार की तरह इस बार भी मौन हो गये सीएमएचओ!

(अनिरूद्ध निगुड़कर)

सिवनी (साई)। चिकित्सकों के पंजीयन के मामले में इस बार भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के द्वारा दी गयी चेतावनी गीदड़ भभकी ही साबित होती दिख रही है। 23 मई को पंजीयन की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी सीएमएचओ के द्वारा किसी तरह की कार्यवाही नहीं की गयी है।

ज्ञातव्य है कि 08 मई को सीएमएचओ के हवाले से एक विज्ञप्ति जारी हुई थी। उस विज्ञप्ति के अनुसार जिले भर में निजि तौर पर चिकित्सा करने वाले निजि चिकित्सकों को उनकी विधा के प्रमाण पत्र के साथ ही साथ प्रदूषण नियंत्रण मण्डल आदि के प्रमाण पत्रों को 15 दिन (23 मई तक) के अंदर सीएमएचओ कार्यालय में जमा कराया जाना अनिवार्य किया गया था।

सीएमएचओ कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि वैसे तो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के द्वारा अक्टूबर से दिसंबर माह के बीच एक बार इस तरह के आदेश जारी किये जाते रहे हैं। इन आदेश के जारी होने के बाद चिकित्सकों के द्वारा चढ़ौत्तरी चढ़ाये जाने के बाद मामला ठण्डे बस्ते के हवाले कर दिया जाता था।

सूत्रों ने आगे बताया कि बीते दिनों जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा सीएमएचओ को दो टूक शब्दों में कह दिया गया था कि इस तरह का आदेश जारी किया जाये और एक दो दिन बाद ही कार्यवाही आरंभ की जाये। इसके उपरांत एक चिकित्सा अधिकारी के आग्रह पर जिलाधिकारी के द्वारा समय सीमा पखवाड़े के लिये बढ़ा दी गयी थी।

सूत्रों ने बताया कि जिला अस्पताल में पदस्थ चिकित्सकों में इस आदेश को लेकर रोष और असंतोष पनप रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि सरकारी स्तर पर मिलने साठ हजार से एक लाख रूपये तक का वेतन उनके गुजारे के लिये कम पड़ता है, जिसके चलते वे निजि तौर पर प्रेक्टिस भी करते हैं।

सूत्रों की मानें तो हर साल मार्च माह में अस्पताल प्रशासन के द्वारा चिकित्सकों से एक शपथ पत्र लिया जाता है जिसमें इस बात का उल्लेख होता है कि वे अपने निवास के अलावा और कहीं किसी भी अस्पताल या स्थान पर निजि चिकित्सा नहीं करेंगे। इसके बाद भी चिकित्सकों के द्वारा अस्पताल में काम के समय भी निजि तौर पर सशुल्क चिकित्सा की जाती है।

सूत्रों ने आगे बताया कि नागपुर और अन्य प्रदेशों से आकर सिवनी के नागरिकों की जेब तराशी करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ भी सीएमएचओ कार्यालय के द्वारा आज तक किसी कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया गया है। सूत्रों की मानें तो इन चिकित्सकों से भी सीएमएचओ कार्यालय को भारी मात्रा में चढ़ौत्तरी प्राप्त होती है।

सूत्रों ने बताया कि अब जबकि समय सीमा निकल चुकी है और सीएमएचओ के द्वारा इस मामले में चुप्पी साध ली गयी है तो वे चिकित्सक जिन्होंने नियम कायदों के हिसाब से अपना पंजीयन करा लिया है वे ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

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