वाहनों की संख्या में विस्फोटक बढ़ौत्तरी, पार्किंग का अतापता नहीं

 

सिवनी में पिछले कुछ वर्षों में वाहनों की संख्या में बेहिसाब बढ़ौत्तरी हुई है लेकिन इनके लिये पार्किंग की कोई व्यवस्था न किये जाने के कारण यातायात की स्थिति छिन्न-भिन्न हो चुकी है, उसके बाद भी किसी के द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

दो पहिया वाहन हों या चार पहिया वाहन, हर तरह के वाहनों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा होता जा रहा है। स्थिति यह है कि पच्चीस-पच्चीस साल पुराने कंडम वाहन भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं लेकिन संबंधित विभागों के द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। पुराने वाहन तो सड़क से हटे नहीं हैं ऊपर से नये वाहनों की तादाद रोजाना ही बढ़ती जा रही है।

इन वाहनों को शहर में व्यवस्थित तरीके से खड़ा किये जाने के लिये न तो कोई स्थान उपलब्ध करवाया गया है और न ही उपलब्ध करवाये जाने की दिशा में किसी के द्वारा कोई प्रयास ही किया जाता दिख रहा है। इन परिस्थितियों के चलते यातायात व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे ही होकर रह गयी है।

यदा कदा यातायात पुलिस के द्वारा यातायात को सुचारू रूप से संचालित करवाये जाने की दिशा में हाथ पैर जरूर मारे जाते हैं लेकिन इसमें भी उसको सफलता मिलती नहीं दिखती है। यातायात पुलिस के द्वारा जब वाहनों को सड़क पर से हटवाया जा रहा होता है उस समय का दृश्य देखने लायक रहता है क्योंकि सड़क से वाहन हटाने के लिये अन्य कोई ऐसा स्थान शेष ही नहीं रह जाता है जहाँ पर चार पहिया वाहनों को खड़ा किया जा सके।

ऐसा भी नहीं है कि नगर पालिका और संबंधित विभाग इस स्थिति से वाकिफ न हों लेकिन सभी के द्वारा ऐसा लगता है जैसे अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली गयी हो। किसी अधिकारी की फैमिली जब सरकारी वाहन में सवार होकर खरीदी के लिये बाजार जाती है तब उस सरकारी वाहन को सड़क पर ही खड़ा कर दिया जाता है। सरकारी वाहन देखकर यातायात पुलिस कर्मी भी, यातायात को व्यवस्थित करने के अपने प्रयास करना छोड़ देते हैं।

ये सरकारी वाहन जितनी देर बाजार में खड़े रहते हैं उतनी देर यातायात जमकर बाधित होता रहता है लेकिन उसके चालक को या तो इससे कोई सरोकार नहीं रहता दिखता है और या फिर उन चालकों को अधिकारी की फैमिली के द्वारा यह हिदायत दे दी जाती है कि वाहन को कहीं और न खड़ा किया जाये। इस तरह का व्यवहार आपत्ति जनक कहा जा सकता है लेकिन मोटी चमड़ी वाले लोगों पर कोई असर होता नहीं दिखता है। कुल मिलाकर नगर पालिका के साथ मिलकर जिला प्रशासन को पार्किंग की व्यवस्था शहर में बनाये जाने के लिये गंभीरता से विचार करते हुए उस पर शीघ्र अतिशीघ्र अमल करना आरंभ कर देना चाहिये।

सुधांशु श्रीवास्तव