छपारा में मानवता हुई शर्मसार

 

 

(शरद खरे)

जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं किस कदर पटरी से उतर चुकी हैं इसका नज़ारा अगर किसी को देखना है तो जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल का निरीक्षण कर लिया जाये। हर अस्पताल में गंदगी बजबजाती मिल जायेगी, दवाओं, स्ट्रेचर, पलंग आदि का अभाव तो मिलेगा ही साथ ही चिकित्सकों और पेरामेडिकल स्टॉफ के आने – जाने का समय भी निर्धारित नहीं रहता।

मई का महीना जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा स्वास्थ्य विभाग के नाम कर दिया गया, यह कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगा। जिला कलेक्टर के द्वारा लगातार ही अस्पतालों विशेषकर जिला अस्पताल का निरीक्षण किया जाता रहा है। उनके निरीक्षण दर निरीक्षण, निर्देश दर निर्देश के बाद भी व्यवस्थाएं पटरी पर क्यों नहीं आ पा रही हैं यह शोध का ही विषय माना जा सकता है।

इसके पहले 14 मई को विधान सभा के पूर्व उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर की पुण्य तिथि पर उनके पुत्र एवं पूर्व विधायक रजनीश हरवंश सिंह सहित काँग्रेस के नेता छपारा अस्पताल में फल वितरण करने गये थे। इस दौरान काँग्रेस के नेताओं को गंदगी से दो चार होना पड़ा था। कुछ नेताओं को तो मितली (उल्टी) की शिकायत भी हुई। पूर्व विधायक रजनीश हरवंश सिंह के द्वारा यहाँ तक कह दिया गया था कि अस्पताल प्रशासन को कम से कम हरवंश सिंह की पुण्य तिथि के दिन तो अस्पताल की साफ सफाई करवा लेना चाहिये थी।

इस आशय की खबरें जब अखबारों की सुर्खियां बनीं तब भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.के.सी. मेश्राम सहित जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ.एम.एस. धर्डे और डॉ.प्रभाकर सिरसाम ने सक्रिय होने की जहमत नहीं उठायी। कितने आश्चर्य की बात है कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस मामले में निश्ंिचत बैठे रहे और 16 मई को जिला कलेक्टर के द्वारा छपारा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया।

यह अपने आप में जिले में पदस्थ अधिकारियों की कार्यप्रणाली को आईना दिखाने के लिये पर्याप्त माना जा सकता है। जिले के प्रभारी मंत्री सुखदेव पांसे के द्वारा भी जिले की सुध नहीं ली जा रही है। लगभग दो दशकों से सिवनी का दुर्भाग्य ही माना जायेगा कि सिवनी के प्रभारी मंत्रियों का उपयोग जिले में महज़ स्थानांतरण के लिये ही सियासी दलों के द्वारा किया जाता रहा है।

बहरहाल, हाल ही में छपारा अस्पताल का एक छायाचित्र सामने आया है जो मानवता को शर्मसार करने वाला है। छपारा के अस्पताल में एक मरीज़ को रक्त चढ़ रहा है और रक्त की बोतल को उस मरीज के पति के द्वारा आधे घण्टे तक थामे रखा जाता है। इसके अलावा एक-एक पलंग पर दो-दो मरीज लेटे हैं। इस तरह से क्या मरीज़ अस्पताल में आराम पा सकते हैं? जाहिर है मरीजों को अस्पताल में आराम की बजाय तकलीफों का सामना ज्यादा करना पड़ रहा होगा।

संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा लगातार ही स्वास्थ्य विभाग पर नज़र रखी जा रही है, उसके बाद भी व्यवस्थाएं जस की तस रहना इस बात का द्योतक है कि उनके द्वारा अब तक किसी अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही नहीं किये जाने से अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो पा रहा है। इस मामले में सत्तारूढ़ काँग्रेस के जिला अध्यक्ष राज कुमार खुराना के ध्यानाकर्षण की जनापेक्षा व्यक्त की जा सकती है।