नर्मदा के पानी में हैं अनेक गुण

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

इंदौर (साई)। अगर आपके घर में नर्मदा का पानी आता है तो आपको आरओ मशीन लगाने की जरूरत नहीं है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हाल ही में सरकार को निर्देश दिया है कि जहां पानी में घुले हुए कुल ठोस तत्वों (टीडीएस) की मात्रा प्रति लीटर 500 मिलीग्राम (एमजी) से कम हो, वहां आरओ के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाएं। इसके अलावा लोगों को मिनरल रहित पानी के बुरे प्रभावों के बारे में सचेत भी करें।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जाने वाली जांच में नर्मदा के पानी में टीडीएस की मात्रा 300 से कम निकली है। जानकारी के मुताबिक एनजीटी ने सरकार से यह भी कहा है कि पूरे देश में जहां कहीं भी आरओ की अनुमति प्राप्त है, वहां 60 फीसदी से ज्यादा पानी को रिकवर करना अनिवार्य करें। बोर्ड के मुख्य प्रयोगशाला अधिकारी डॉ. डीके वाघेला ने बताया कि इंदौर में नर्मदा का पानी सप्लाई होता है।

इंदौर के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा 17 स्थानों पर नर्मदा के पानी का सैंपल लिया गया, लेकिन हर जगह टीडीएस की मात्रा 300 से कम ही निकली है, जबकि इसका औसत 208 ही होता है, इसलिए इस पानी के लिए आरओ मशीन का उपयोग करने की जरूरत ही नहीं है। जरूरत पड़ने पर केवल फिटकरी डालकर पानी को साफ किया जा सकता है।

यह होता है आरओ सिस्टम : विशेषज्ञों के मुताबिक रिवर्स ओस्मोसिस (आरओ) एक वाटर ट्रीटमेंट प्रक्रिया है, जिसमें दबाव का इस्तेमाल कर अणु को सेमीपारमिएबल मेंब्रेन (अर्द्धपारगम्य झिल्ली) से गुजरने के लिए बाध्य किया जाता है। एनजीटी की समिति ने कहा है कि यदि पानी में टीडीएस प्रतिलीटर 500 एमजी से कम है तो आरओ सिस्टम लाभकारी नहीं हो सकता। वहीं आज कल आरओ से पानी का टीडीएस कम कर दिया जाता है, जिससे शरीर को जरूरी तत्व नहीं मिल पाते हैं, जिससे हृदय से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। जरूरत होने पर आरओ के पानी में सामान्य पानी को मिलाकर संतुलित किया जा सकता है।

यह होता है टीडीएस : विशेषज्ञों के मुताबिक टीडीएस अकार्बनिक साल्ट के साथ ही कार्बनिक पदार्थों की अल्प मात्रा से बना होता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के अध्ययन के अनुसार पानी में 300 एमजी प्रतिलीटर से कम टीडीएस को उत्तम माना जाता है। 900 एमजी प्रतिलीटर को खराब और 1200 एमजी से ऊपर को अस्वीकार्य माना गया है।

बोरिंग का पानी होने पर क्या करें : विशेषज्ञों के मुताबिक बोरिंग ज्यादा गहराई तक होने पर पानी में ठोस तत्वों की मात्रा बढ़ती है। अगर बोरिंग 400 से 500 फीट तक है तो उसके पानी में एक हजार तक टीडीएस हो सकता है। जो पीने के लिए उपयोग में लिया जा सकता है, लेकिन अगर बोरिंग और ज्यादा गहरा है तो उसमें टीडीएस की मात्रा बढ़ सकती है। ज्यादा टीडीएस होने पर पानी को उबालकर उसके ठोस तत्वों को कम किया जा सकता है।

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