कांग्रेस का मालवा में प्रियंका पर दांव

 

(राकेश अग्निहोत्री)

मध्यप्रदेश में चौथे और अंतिम चरण के लिए जिन 8 सीटों पर 19 मई को मतदान होना वो मालवा निमाड़ क्षेत्र में आती है.. जहां कांग्रेस ने राहुल गांधी को सक्रिय रखते हुए प्रियंका गांधी पर भी दांव लगाया है.. जो मध्य प्रदेश के अपने पहले दौरे में उज्जैन में महाकाल के दर्शन करने के बाद ही रतलाम में चुनावी सभा और इंदौर लोकसभा क्षेत्र में रोड शो करेंगी… शुक्रवार को भोपाल, मुरैना,गुना, सागर, ग्वालियर, विदिशा, राजगढ़, भिंड क्षेत्रों में प्रचार थमने के साथ मतदान 12 मई को होगा.. मतदान के बाद कांग्रेस की ओर से अंतिम चरण में जहां वोट डाले जाएंगे उन सीटों पर दिग्विजय सिंह,ज्योतिरादित्य सिंधिया भी क्या कमलनाथ के साथ नजर आएंगे..

तो सवाल खड़ा होना लाजमी जिस मालवा निमाड़ क्षेत्र की सिर्फ रतलाम झाबुआ सीट पर कांग्रेस का कब्जा वहां से कुछ अतिरिक्त सीट भी क्या कांग्रेस के खाते में डालकर राहुल प्रियंका की जोड़ी मोदी शाह के मिशन को प्रभावित करने की सामर्थ साबित करेंगे.. इसी क्षेत्र के मंदसौर का किसान आंदोलन पूरे देश में विधानसभा चुनाव से पहले चर्चा का विषय बना था ..बावजूद इसके मंदसौर विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रहा.. तो सवाल उत्तर प्रदेश से बाहर निकल कर जब केरल, दिल्ली,हरियाणा में प्रियंका के रोड शो जनता को लुभा रहे आखिर मालवा की सीट पर कांग्रेस को कितनी ताकत देंगी..

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी 13 मई को उज्जैन में महाकाल के दर्शन करने के बाद रतलाम और इंदौर तो इससे पहले 11 मई को राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी देवास-शाजापुर लोकसभा के शुजालपुर दूसरी धार लोकसभा के अमझेरा और तीसरी खरगोन में सभा होगी। अभी तक दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य जो लोकसभा का चुनाव लड़ रहे अपने क्षेत्र से बाहर बहुत सीमित जगह पहुंच पाए.. मुख्यमंत्री कमलनाथ जरूर छिंदवाड़ा से बाहर दूसरे क्षेत्रों में लगातार पहुंच रहे हैं.. राहुल गांधी के मध्यप्रदेश के दौरे के दौरान सिर्फ कमलनाथ ही उनके साथ मंच साझा करते हुए नजर आए..

विधानसभा चुनाव में एक मंच पर नजर आने वाले दिग्विजय और ज्योतिरादित्य राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ अभी तक नजर नहीं आए.. और ना ही राहुल गांधी भोपाल के साथ गुना शिवपुरी के दौरे पर राजा महाराजा के के लिए प्रचार का हिस्सा बने.. ऐसे में अब जब मालवा निमाड़ में हलचल तेज होने वाली तब प्रियंका गांधी के दौरे से कांग्रेस ने ज्यादा उम्मीदें लगा रखी है ..

इन 8 सीटों का अपना महत्व तो इनसे जुड़े कुछ उम्मीदवारों की अहमियत को नकारा नहीं जा सकता ..चाहे फिर वह विधानसभा चुनाव के ठीक पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की भूमिका बदल दिए जाने वाले अरुण यादव जो खंडवा से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान कोई एक बार फिर चुनौती दे रहे .. केंद्र में मंत्री रह चुके अरुण यादव ने राहुल गांधी के सीधे निर्देश पर शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ बुदनी से विधानसभा चुनाव लड़ा था जो हार गए थे..

ऐसे ही राहुल ब्रिगेड में शामिल मीनाक्षी नटराजन जो लोकसभा का पिछला चुनाव हार चुकी ..एक बार फिर मंदसौर से मैदान में हैं.. इसके अलावा मध्य प्रदेश के 4 महानगर में शामिल इंदौर सीट पर भी कांग्रेस अपनी संभावनाओं को जीत में बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ रही ..जहां प्रियंका गांधी का रोड शो 13 मई को प्रस्तावित है.. जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 मई के बाद दूसरे दिन होगा ..मोदी का यह रोड शो तब होगा जब भोपाल समेत दूसरे लोकसभा क्षेत्रों में मतदान चल रहा होगा ..

यह वह सीटें जहां प्रज्ञा ठाकुर की मौजूदगी से मोदी शाह संघ भाजपा तो दिग्विजय सिंह से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तो केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की साख दांव पर लगी है.. भाजपा और कांग्रेस की ओर से नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राहुल गांधी के ताबड़तोड़ दौरे मध्यप्रदेश में लगातार चल रहे हैं.. तो भाजपा की ओर से शिवराज सिंह चौहान की सबसे ज्यादा सभाएं दूसरे नेताओं पर भारी है.. भाजपा और कांग्रेस के कई दूसरे राष्ट्रीय नेता भी इस चुनाव का हिस्सा बने लेकिन ज्यादातर प्रेस कॉन्फ्रेंस किया नुक्कड़ सभाओं तक ही सीमित रहे ..लेकिन अब 12 मई के मतदान के बाद दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य भाजपा की ओर से नरेंद्र सिंह तोमर जैसे नेताओं के प्रवास अंतिम चौथे चरण की सीटों पर बढ़ेंगे ..

ऐसे में एक बड़ा फोकस प्रियंका गांधी पर बनने से इनकार नहीं किया जा सकता.. मालवा क्षेत्र जहां से राहुल गांधी ने किसान कर्ज माफी के एजेंडे को आंदोलन के बाद बढ़ाया था.. जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी.. बात निकली तो दूर तक जा पहुंची और किसान कर्ज माफी का फार्मूला सामने लाया गया ..और राहुल गांधी ने कर्ज माफ नहीं करने वाले किसानों को जेल नहीं जाने देने के अपने वचन को राष्ट्रीय स्तर पर घोषणा पत्र में शामिल किया… मालवा वह क्षेत्र जिसके पास विधानसभा चुनाव की चाबी रहती है ..इस क्षेत्र में आदिवासी पिछड़े के साथ दलित और सवर्ण मतदाताओं का प्रभाव साफ देखा जा सकता है..

प्रियंका गांधी ने जिस तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश से बाहर निकल कर दिल्ली, हरियाणा,पंजाब इससे पहले राहुल गांधी के वायनाड केरल में रोड शो नुक्कड़ सभाओं के जरिए अपनी लोकप्रियता साबित की.. उसके बाद ही मध्यप्रदेश में उनकी एंट्री गौर करने लायक होगी .. प्रियंका इन दिनों केंद्र की भाजपा सरकार की विफलताओं को गिनाते हुए सीधे नरेंद्र मोदी पर न सिर्फ हमला कर रही.. बल्कि कांग्रेस के घोषणा पत्र से जुड़े मुद्दों को धार देने में जुटी है …राहुल ब्रिगेड की मीनाक्षी नटराजन भी 2014 का चुनाव मंदसौर से हार चुकी है तो इसी क्षेत्र से ही मोदी लहर में कांतिलाल भूरिया जैसे कांग्रेस के बड़े आदिवासी नेता चुनाव हार गए थे..

तो भूरिया ने ही उसके बाद उपचुनाव में कांग्रेस की सीट संख्या लोकसभा में बढ़ा भी दी थी.. ऐसी ही इंदौर लोकसभा सीट पर कांग्रेस की नजर है जिसका प्रतिनिधित्व लगातार सुमित्रा महाजन करती रही.. जो लोकसभा अध्यक्ष भी बनी ..लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया .देखना दिलचस्प होगा प्रियंका पर दांव लगाकर कांग्रेस मालवा में अपनी सीट में कितना इजाफा कर पाती है ..जहां ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला बन चुका है ..

कुछ सीटों पर आदिवासी संगठन जयस की मौजूदगी जरूर कांग्रेस की परेशानी बढ़ा रही.. इन दिनों प्रियंका गांधी का भाषाओं में अंदाजे बयां हो या फिर रोड शो में जनता से कनेक्टिविटी और उन्हें देखने सुनने के लिए उमड़ता जनसैलाब चर्चा का विषय बन चुका है …चाहे फिर इसे दिल्ली में केजरीवाल के बयान से जोड़कर देखा जाए या फिर उत्तर प्रदेश में मायावती और अखिलेश के इशारों को समझा जाए प्रियंका का वह बयान चर्चा में रहा.. जिसमें उन्होंने भाजपा को यह कहकर निशाने पर लिया कि वह कभी अपने विचारधारा और सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगी चाहे फिर जान ही क्यों ना चली जाए ..

यही नहीं उन्होंने जिस तरह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवारों को जीतने वाला या फिर भाजपा के वोट काटने वाला बताया.. उससे उनके इरादों को समझा जा सकता है.. प्रियंका गांधी के वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की अटकलों पर पहले ही पूर्ण विराम लग चुका है.. लेकिन गंगा किनारे वाराणसी का एक द्वारा कर चुकी प्रियंका के चुनाव प्रचार का हिस्सा बनने से इंकार नहीं किया जा सकता.. तो राहुल गांधी अमेठी के साथ जिस वायनाड सीट से चुनाव लड़ रहे वहां की जिम्मेदारी भी प्रियंका निभा चुकी है.. उत्तर प्रदेश में वह कांग्रेस का एजेंडा स्पष्ट कर चुकी है..

जो लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के एजेंडे पर आगे बढ़ने का इशारा कर चुकी है ..ऐसे में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ भी उनकी मौजूदगी चर्चा का विषय बन चुकी ..प्रियंका के अमेठी और रायबरेली में सक्रिय रहते ही अखिलेश और मायावती का सॉफ्ट कॉर्नर और क्षेत्र के मतदाताओं के लिए संदेश चुनाव परिणाम बाद आने की राजनीति की ओर भी इशारा कर चुका है.. देखना दिलचस्प होगा इंदौर रोड शो के दौरान क्या कमलनाथ के अलावा प्रियंका के साथ ज्योतिरादित्य और दिग्विजय सिंह जैसे नेता भी नजर आएंगे या मध्य प्रदेश के अंतिम चरण के लिए कोई एक और दौरा प्रियंका मालवा क्षेत्र का कर सकती है.. प्रियंका गांधी में उनके चाहने वाले इंदिरा गांधी का अश्क देखते हैं..

जिन्होंने लोकसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस में सक्रिय जिम्मेदारी निभाते हुए उत्तर प्रदेश की कमान संभाल रखी है.. लेकिन अब यूपी से बाहर भी उनकी बढ़ती डिमांड उन्हें मध्य प्रदेश भी आ रही है.. खुद लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद प्रियंका गांधी की गिनती राहुल गांधी के बाद नंबर दो ऐसे नेता के तौर पर होने लगी है जिसमें न सिर्फ भीड़ जुटाने की क्षमता साबित हो चुकी बल्कि संगठन के कायाकल्प की उम्मीद भी उनसे बढ़ चुकी है..

(साई फीचर्स)

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