वृद्धाश्रम पहुंचे कलेक्टर, बुजुर्ग को पहुंचाया उनके घर

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

दमोह (साई)। मध्य प्रदेश के उमरिया में तैनात कलेक्टर स्वरोचिश सोमवंशी ने पिछले हफ्ते कुपोषित बच्चों के लिए अपने दफ्तर से एसी निकलवाकर पुनर्वास केंद्र में लगवा दिए थे। इस घटना के एक हफ्ते का बाद राज्य के एक अन्य डीएम तरुण राठी ने मानवता की मिसाल पेश की है।

मध्य प्रदेश के दमोह में तैनात कलेक्टर राठी गत दिवस वृद्धाश्रम का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान एक बुजुर्ग ने अपने घर जाने की इच्छाृ जताई तो वह उन्हें पहुंचाने उनके घर तक गए।

कलेक्टर तरुण वृद्धाश्रम में बुजुर्गों से बात कर रहे थे। इसी दौरान कलेक्टनर हुज्जू अहिरवार के पास पहुंचे। बरसवा गांव के रहने वाले अस्सी वर्षीय हुज्जू ने अपने घर जाने की इच्छा जताई। डीएम ने बताया, श्मैं वृद्धजनों से बात करके यह जानने की कोशिश कर रहा था कि वे किन परिस्थतियों में वहां रह रहे हैं। मैं उनसे उनके परिवार, बेटों और बेटियों के बारे में बात कर रहा था। हुज्जू ने मुझे अपने परिवार के बारे में बताया। उनके तीन बेटे और एक बेटी है।श्

कलेक्टर ने कहा कि उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ कि तीन बेटों के होने के बावजूद हुज्जू को वृद्धाश्रम में अपना जीवन गुजारना पड़ रहा है। कलेक्टर ने हुज्जू से पूछा कि क्या वह अपने बच्चों के पास घर जाना चाहते हैं तो उन्होंने हां में उत्तर दिया। उन्होंने हुज्जू को अपने साथ लिया और वहां से बाहर निकल आए। उन्होंने वृद्ध हुज्जू। को अपनी कार में बैठाया और ड्राइवर को हुज्जू के बताए गए पते पर चलने को कहा।

कलेक्टर वृद्धाश्रम से दस किलोमीटर दूर हुज्जू के बेटे राजेश के घर पहुंचे। राजेश के घर पर कलेक्टर की गाड़ी रुकने पर गांव के लोग एकत्र हो गए। राजेश को भी आश्चर्य हुआ लेकिन उससे ज्यादा उन्हें तब हैरानी हुई जब हुज्जू कलेक्टर के साथ उनकी कार से नीचे उतरे। डीएम ने राजेश को समझाया और हुज्जू को अपने साथ घर में रखने के लिए राजी किया। राजेश ने कहा कि वह बहुत गरीब है।

कलेक्टर ने बताया कि पूछने पर उन्हें पता चला कि हुज्जू की बेटी गांव की सरपंच है। वह वहां पहुंचे लेकिन वह घर पर नहीं थी। उन्होंने राजेश को हुज्जूग को साथ रखने के लिए मना लिया। उन्हों ने बताया कि हुज्जू को वृद्धावस्था पेंशन भी मिल रही है।

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