जानिए मानूसन और प्री मानसून में अंतर

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली (साई)। केरल में इस वक्त बारिश हो रही है (लक्षद्वीप और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी) क्योंकि इन राज्यों में मॉनसून पहुंच चुका है। देश के कुछ और हिस्सों में भी आज बारिश हो रही है जैसे सोमवार को मुंबई में हुई। हालांकि, जिन अन्य शहरों में बारिश हो रही है उसे मॉनसून नहीं प्री-मॉनसून कहा जा रहा है। मॉनसून और प्री-मॉनसून में क्या फर्क है, जानें यहां।

मौसम विभाग ने समझाया क्या है मॉनसून : केरल में मॉनसून आगमन की पुष्टि मौसम विभाग ने कर दी है। मौसम विभाग यह पुष्टि 3 तथ्यों को ध्यान में रखकर करता है बारिश की स्थिति, हवाओं की गति और लंबी दूरी का रेडिएशन। हर साल 10 मई के बाद 14 मौसम स्टेशनों में से 60ः अगर 2.5 एमएम से अधिक लगातार 2 दिनों तक बारिश की पुष्टि करते हैं तो मॉनसून का ऐलान किया जाता है। मॉनसून के ऐलान की तारीख दूसरे दिन की होती है। सैटलाइट तस्वीरों के जरिए हवाओं की गति और लंबी दूरी के रेडिएशन का ऐलान किया जाता है।

कैसे महसूस करें प्री-मॉनसून और मॉनसून में फर्क : सवाल है कि मॉनसून और प्री-मॉनसून में फर्क को आम आदमी कैसे समझ सकता है? मौसम पूर्वानुमान कंपनी स्काईमेट ने इसे तापमान के आधार पर समझाया है। प्री-मॉनसून के दौरान दिन भर गर्मी और उमस बनी रहती है। मॉनसून अपने साथ तेज गति से चलनेवाली हवाएं और तापमान में गिरावट भी लाता है।

बादलों के आकार में भी होती है भिन्नता : प्री-मॉनसून और मॉनसून के बादलों के आकार भी अलग-अलग होता है। प्री-मॉनसून के बादल लंबे और खड़े जैसे नजर आते हैं और अमूमन यह दोपहर बाद ही सक्रिय नजर आते हैं। मॉनसून के बादल अमूमन चादर जैसे होते हैं और लगातार कम गहराई वाले होते हैं।

हालांकि, इसके बावजूद इन बादलों के लेयर हल्के होते हैं और इनमें नमी भरी होती है। बादलों के बीच का यह अंतर उनकी चाल और वर्षा की बौछार में भी नजर आता है। मॉनसून के बादलों की बौछार ज्यादा समय तक होती है। बूंदों के साथ ही हवाओं की गति और दिशा में भी फर्क होता है। प्री-मॉनसून की हवाओं का असर धूल भरी आंधी के रूप में नजर आता है और मॉनसून की हवाएं इसकी तुलना में ज्यादा ताकतवर होती हैं।

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