अव्यवस्थाओं के साये में लोक सेवा केंद्र

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। लोक सेवा केंद्र में कर्मचारियों को बहुत ही कम वेतन दिया जा रहा है। कर्मचारियों के बीच अब शोषण की आवाज मुखर होती दिख रही है।

बताया जाता है कि श्रम विभाग के आदेश जारी होने के बावजूद यहाँ पर लोक सेवा केंद्र सिवनी में ऑपरेटर एवं कर्मचारी जो कि सुबह साढ़े 09 बजे से लेकर रात्रि 08 बजे तक शासन की समस्त सेवाओं का संचालन करते हैं किंतु शासन के नियमानुसार दैनिक मजदूरी जो कि 8,000 लगभग देनी चाहिये पर सिवनी लोक सेवा केंद्र पर 2000 से 2500 हजार रुपये ही कर्मचारियों को दिया जाता है।

कर्मचारियों के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार लोक सेवा केंद्र के प्रबंधक द्वारा लगभग 06 वर्षों से कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। कर्मचारियों ने जिलाधिकारी प्रवीण सिंह से माँग की है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाकर लोक सेवा केंद्र में हो रही इस विसंगति को दूर कराया जाये।

लोक सेवा केंद्र में आने वाले नागरिकों के साथ ही साथ प्रदेश के कई जिलों के नागरिकों से चर्चा की गयी तो उनका यही कहना है कि कलेक्टर, तहसीलदार, एसडीएम के प्रांगण में ठेकेदारी प्रथा को बंद करना चाहिये। इसे शासन व सरकार को चलाना चाहिये क्योंकि लोक सेवा केंद्रों की आड़ में ठेकेदारों के साथ ही साथ इन्हें संचालन करने वाले भी लाभ कमा रहे हैं, सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।

वहीं लोक सेवा केंद्र में जो कर्मचारी काम कर रहे हैं उन्हें कलेक्टर दर से भी कम पारिश्रमिक मिल रहा है जबकि कई कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें तीन – तीन वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन रोजगार के अभाव में वे ठेकेदार के भरोसे काम करने को मजबूर हैं जबकि शासन चाहे तो इसे संचालित कर यहाँ पर कर्मचारियों की भर्त्ती कर उन्हें वेतन भी आसानी से दे सकती है और सरकार का राजस्व भी बढ़ सकता है। लोगों का कहना है कि भाजपा शासन काल में ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से इसे संचालित किया जा रहा है जिससे नागरिकों के साथ ही साथ लोक सेवा केंद्र के कर्मचारियों का भी शोषण हो रहा है।

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