कब पूरी होंगी स्वास्थ्य विभाग की जाँचें!

 

     

 

लंबे समय से लंबित ही पड़ी हैं अनेक जाँचें

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के अधीन भर्राशाही चरम पर पहुँच चुकी है। आलम यह है कि समय सीमा में जाँच के आदेश दिये जाने के बाद भी लंबे समय तक जाँच अधिकारियों के द्वारा जाँच को लंबित रखा जा रहा है।

सीएमएचओ कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस साल फरवरी माह में जिला काँग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जकी अनवर खान के निधन के समय अस्पताल प्रशासन के द्वारा लापरवाही किये जाने के आरोप काँग्रेस के द्वारा ही लगाये गये थे।

सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में प्रदेश में काँग्रेस की सरकार है और काँग्रेस की सरकार के रहते हुए भी काँग्रेस के नुमाईंदे अपने ही एक वरिष्ठ सदस्य के निधन के दौरान हुई लापरवाहियों की जाँच नहीं करवा पा रहे हैं इससे ज्यादा शर्म की बात और क्या हो सकती है। यह स्थिति तब है जबकि इस मामले में जिला काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राज कुमार खुराना के द्वारा इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की गयी थी।

सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से इस मामले की जाँच समय सीमा में करने के निर्देश दिये जाने के बाद भी जाँच तीन महीनों बाद कहाँ तक पहुँची है इस बारे में शायद ही कोई जानता हो। सूत्रों ने कहा कि इस तरह जिले में पदस्थ अधिकारियों की कार्यप्रणाली से मुख्यमंत्री कमल नाथ का नाम ही खराब होता दिख रहा है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा के निधन के बाद उनके परिजनों को ही उनकी पार्थिव देह को स्ट्रेचर पर खुद ही ढकेलते हुए ले जाना पड़ा था। इसका एक वीडियो भी जमकर वायरल हुआ था। इस वीडियो में जिला काँग्रेस अध्यक्ष राज कुमार खुराना ने भी स्टेªेचर को धक्का लगाया गया था। इसके बाद भी अब तक इस मामले में जाँच की माँग जिला काँग्रेस के द्वारा नहीं की जा सकी है।

सूत्रों ने बताया कि इसके अलावा सिविल अस्पताल लखनादौन में एमपीडब्ल्यू के पद पर पदस्थ अभय पाराशर के खिलाफ आशीष गोल्हानी के द्वारा शिकायत की गयी थी। इसमें आशीष गोल्हानी के द्वारा अभय पाराशर पर संगीन आरोप लगाये गये थे। इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा तीन सदस्यीय जाँच दल का गठन 25 मई को किया जाकर एक सप्ताह में जाँच प्रतिवेदन देने की बात कही गयी थी।

एक माह बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। सूत्रों की मानें तो आशीष गोल्हानी की बजाय किसी अन्य मिलते जुलते नाम से एक पत्र सीएमएचओ को भेजा गया है जिसमें कहा गया है कि न तो उनके द्वारा शिकायत की गयी है और न ही वे जाँच की माँग करते हैं। इस पत्र को आधार बनाकर अब जाँच को ही समाप्त किये जाने का ताना बाना सीएमएचओ के द्वारा बुना जा रहा है।

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