कैसे बनेगा हरा-भरा सिवनी

 

सिवनी में इन दिनों कुछ लोगों के द्वारा सिवनी को हरा-भरा बनाये जाने की दिशा में प्रशंसनीय कार्य किया जा रहा है। उनके इस कार्य में नगर पालिका के साथ ही साथ जिला प्रशासन का भी सहयोग मिल जाये तो इसे सोने में सुहागा ही कहा जायेगा। इस स्तंभ के माध्यम से मैं अपनी यही बात रखना चाहता हूँ।

देखने वाली बात यह है कि सिवनी शहर में ऐसा कोई रिक्त स्थान शेष नहीं बचा है जहाँ नये वृक्षों का रोपण किया जा सके। यदि ऐसा संभव नहीं है तो सिवनी शहर कैसे हरा-भरा बना पायेगा। सड़क किनारे पैर रखने के लिये भी जगह शेष नहीं रह गयी है ऐसे में सड़क किनारे वृक्षों का रोपण पूरी तरह असंभव ही नज़र आ रहा है।

यह बात समझ से परे है कि सिवनी की सड़कों को चौड़ा करने की दिशा में कोई भी प्रयासरत क्यों नहीं दिख रहा है बिना सड़कें चौड़ी किये विकास की कल्पना करना लोगों के गले नहीं उतर रहा है। हाल ही में कटंगी नाका से गणेश चौक तक की सड़क को चौड़ा किये जाने का मौका आया था लेकिन कुछ अति होशियार लोगों के द्वारा इसे नाली टू नाली की बात कही जाकर, उस मौके को ही पलीता लगा दिया। स्थिति यह है कि इस रोड पर अब वृक्षारोपण तो दूर की बात है बल्कि आना-जाना करना भी दिन प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है।

नेहरू रोड, बुधवारी बाज़ार, बाहुबली चौक के आसपास का क्षेत्र, बरघाट रोड जैसे महत्वपूर्ण स्थान ऐसे हो गये हैं कि इन क्षेत्रों को हरा-भरा करना अत्यंत दुष्कर कार्य प्रतीत हो रहा है। इन क्षेत्रों में सड़कों को चौड़ा किया जाना अविलंब आवश्यक हो गया लेकिन नगर पालिका प्रशासन के साथ ही साथ जिला प्रशासन भी ऐसा करने से पता नहीं क्यों डरता हुआ प्रतीत हो रहा है।

इन परिस्थितियों में सक्रिय और ऊर्जावान लोगों से ही अपेक्षा की जा सकती है कि उनके द्वारा बुधवारी के डिवाईडर जैसे स्थानों पर पौधारोपण करके, वे सिवनी को हरा-भरा करने की भी कोशिश अवश्य करें। शीतल छाया देने वाले पौधे यदि लगाये जाते हैं तो यह भी सिवनी के लिये अत्यंत फायदेमंद ही साबित होगा। नगर पालिका और जिला प्रशासन से उम्मीद शायद तब ही की जा सकेगी जब यहाँ कर्त्तव्यनिष्ठ ईमानदार लोग होंगे।

योगेश पाराशर

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