55 गाँवों के किसान आज करेंगे छुई में आंदोलन

 

(ब्यूरो कार्यालय)

कान्हीवाड़ा (साई)। जिले के कान्हीवाड़ा क्षेत्र में ओलावृष्टि का मुआवजा न मिलने पर क्षेत्र के 55 गाँवों के किसान ब्रहस्पतिवार को छुई में आंदोलन करेंगे।

देश प्रदेश के नेताओं में किसानों का सबसे बड़ा हितैषी बनने की होड़ लगी हुई है किन्तु धरातल पर किसान अपने हक के लिये संघर्षरत ही दिख रहा है। विगत वर्ष 13 फरवरी को सिवनी जिल में लगभग 283 गाँवों में भीषण ओलावृष्टि हुई थी, जिससे किसानों की फसल को भारी नुकसान पहुँचा था। इस नुकसानी का जायजा तत्कालीन कलेक्टर गोपाल चंद डाड एवं राजस्व अमले के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा भी लिया गया था। सहायता के रूप में प्रभावित किसानों को आरबीसी 6-4 के तहत सहायता भी दी गयी थी।

सिवनी तहसील के राजस्व निरीक्षक मण्डल भोमा के अंतर्गत लगभग 111 गाँव आते हैं जिसमें लगभग 77 गाँवों के किसानों की फसल नष्ट हुई थी। इनमें से 55 गाँव गौण्डी हिनोतिया, खुर्सीपार, चंदनवाड़ा कला, चंदनवाड़ा खुर्द, पुंगार, थांवरी, भाटा, रडहाई, टेकारांजी, किरकीरांजी, नरवाखेड़ा, हिनोतिया, आमाकोला, जामुनटोला, मुहबेली, ढेका पांजरा, छुई, मोहगाँव, कतरवाडा, सिंगौड़ी, उमरिया, बाम्हनवाड़ा, भोमाटोला, पिण्डरई, कन्हान पिपरिया एवं पद्दीकोना आदि ग्राम के हजारों प्रभावित कृषकों को अभी तक नष्ट हुई फसल की बीमा राशि अप्राप्त है।

बताया जाता है कि इस संबंध में अनेक बार कृषकों के द्वारा जन प्रतिनिधियों एवं जिला कलेक्टर को अवगत करवाया गया परंतु संतुष्टि पूर्ण जवाब न मिल पाने के कारण प्रभावित कृषक गणों में आक्रोश व्याप्त है।

सभी ग्रामों के आक्रोशित किसानों ने कान्हीवाड़ा उप तहसील मुख्यालय में एक बैठक रखी थी तथा रैली निकालकर नारे लगाते हुए पुलिस थाना कान्हीवाड़ा पहुँचकर जिला कलेक्टर के नाम थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में बीमा राशि के तत्काल भुगतान करवाने की माँग की गयी।

किसानों ने अल्टीमेटम दिया था कि आने वाले 05 दिवस के अंदर यदि उन्हें संतुष्ट नहीं किया गया तो 18 जुलाई को उग्र आंदोलन धरना प्रदर्शन करने वे मजबूर होंगे जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। बताया गया है कि इस क्रम में किसानों को 05 दिन बीत जाने के बाद भी किसानों की कोई सुध नहीं ली गयी जिससे आक्रोशित होकर किसानों के द्वारा ग्राम छुई बस स्टैण्ड में उग्र आंदोलन किया जायेगा जो कि अनिश्चित कालीन तक चलेगा।