हरियाली अमावस्या पर बन रहा ये दिव्य संयोग

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। प्रकृति और पितृ पर्व हरियाली अमावस्या पर इस बार गुरुपुष्य नक्षत्र के साथ अमृतसिद्धि व सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग बन रहा है। सालों बाद दिव्य संयोग में आने वाली अमावस्या पर पितृ कर्म व पौध रोपण करना श्रेष्ठ रहेगा। इस बार हरियाली अमावस्या पर 06 घण्टे तक पुष्य नक्षत्र का योग रहेगा।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसर पंचांगीय गणना के अनुसार हरियाली अमावस्या 01 अगस्त को पुष्य नक्षत्र, सिद्धि योग, नागकरण व कर्क राशि के चंद्रमा के संयोग में मनायी जायेगी। गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का होना अमृत सिद्धि व सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण करता है। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि तथा उप स्वामी बृहस्पति हैं। सिद्धि योग के स्वामी भगवान श्री गणेश हैं। इस प्रकार के संयोग में अमावस्या पर तंत्र व मंत्र की सिद्धि विशेष फल प्रदान करती है। पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिये भी यह दिन खास है। इस दिन तीर्थ पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिण्डदान करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि तथा वंशवृद्धि होती है।

पितरों के नाम से पौधा रोपण के लिये महत्वपूर्ण दिन : हरियाली अमावस्या प्रकृति पर्व है। इस दिन वृक्षों का पूजन तथा पौधा रोपण की मान्यता है। इस दिन घरों में भी हरियाली का पूजन किया जाता है। वनस्पति तंत्र के अनुसार अमृत सिद्धि योग में पौधा रोपण करने से विशिष्ट फल की प्राप्ति होती है। संयोग से इस बार हरियाली अमावस्या पर अमृत सिद्धि योग का संयोग है। ऐसे में इस दिन पितरों के निमित्त पौधा रोपण करना शुभफलदायी माना गया है।

बुध होंगे मार्गीय : जलवायु व मौसम के कारक ग्रह बुध अमावस्या पर सुबह 9.42 बजे मार्गीय हो रहे हैं। बुध के मार्गीय होते ही वर्षा ऋतु के चक्र में अचानक परिवर्तन आयेगा। इसका प्रभाव भी दिखायी देगा। वहीं गुरु का वृश्चिक राशि में वक्रगत दृष्टि से कर्क राशि स्थित सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध व शुक्र से नवम – पंचम दृष्टि संबंध बनेगा। इसका प्रभाव जलीय ऋतु चक्र के सकारात्मक पक्ष को प्रबल करेगा।

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