इस सत्र से भावी डॉक्टर पढ़ेंगे व्यावहारिक पाठ

 

 

 

 

मरीज से मित्रता रखने के सीखेंगे गुर

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। इस सत्र से एमबीबीएस छात्रों (भावी डॉक्टर) को मरीजों से मित्रता रखने और खुद के गुस्से पर काबू रखने के लिए व्यवहारिक पाठ पढ़ाया जाएगा। देशभर में मरीज और डॉक्टर के बीच सामने आ रही विवाद की घटनाओं को देखते हुए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने यह निर्णय लिया है।

इसके लिए एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव किए गए हैं, जो सत्र 2019 से लागू कर दिए गए हैं। क्लास शुरू होने के साथ इसकी पढ़ाई भी शुरू हो जाएगी। इसमें एक महीने के फाउंडेशन कोर्स को शामिल किया है। इसमें छात्रों को व्यवहारिक बातें और भविष्य में उनकी जिम्मेदारियां व मरीज के रूप में समाज की उनसे अपेक्षाओं के बारे में बताया जाएगा। पाठ्यक्रम में बदलाव का उद्देश्य देश को अच्छे और सुलझे हुए डॉक्टर देना बताया जा रहा है।

एमसीआई मेडिकल कॉलेजों का संचालन करती है। इसने कॉलेजों में एमबीबीएस के छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसे कॉम्पटेटिव अंडर ग्रेज्युएट बेस्ड मेडिकल एजुकेशन नाम दिया है। इसकी खासियत यह है कि इसमें दाखिले के बाद से ही शुरू के एक महीने तक छात्रों को फाउंडेशन कोर्स पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा साढ़े चार साल की पढ़ाई में कई अतिरिक्त प्रशिक्षण दिए जाएंगे। मरीजों के साथ रखा जाएगा, गांवों में भी भेजेंगे।

सबसे खास बात यह है कि छात्रों को शिशु स्वास्थ्य, मातृत्व स्वास्थ्य, मलेरिया, डायरिया समेत 20 गंभीर व रूटीन की बीमारियों व उनके इलाज को लेकर विशेष तौर पर दक्ष कराया जाएगा। इसके अलावा राज्य में किसी विशेष बीमारी का प्रकोप रहता है तो उसकी भी जानकारी दी जाएगी।

वीडियो दिखाकर बताएंगे, कैसे करें इलाज रू शिक्षण कार्य कराने के लिए नई व आधुनिक तकनीकी का ज्यादा उपयोग किया जाएगा। जैसे कि वीडियो के आधार पर नई बीमारी व उसके इलाज के बारे में बताया जाएगा। गंभीर बीमारियों का विजुअल प्रजेंटेशन कर समझाइश दी जाएगी।

पाठ्यक्रम में ये भी होगा रू छात्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भेजा जाएगा। नई बीमारियों के इलाज की पद्धति और दवाइयों की जानकारी देने के लिए समय-समय पर कार्यशालाएं कराईं जाएंगी। मरीजों के आसपास रखा जाएगा, एक छात्र को किसी एक गंभीर बीमारी के मामले का अध्ययन करना होगा।

मरीजों की मौत की स्थिति में उनके परिजनों के प्रति कैसे व्यवहार करें, उनके गुस्से को किस तरह बर्दाश्त किया जाए और उन्हें कैसे संभाला जाए, इस मैदानी ज्ञान की समझ छात्रों में पैदा की जाएगी। छात्रों को जो सीखाया, पढ़ाया है, शिक्षक उसकी समीक्षा करेंगे। यह देखेंगे कि छात्रों ने कितना सीखा है। थ्योरी के साथ क्लिनिकल को विशेष तवज्जो दी जाएगी।

पाठ्यक्रम में बदलाव की ये भी वजह रू छात्रों का ध्यान थ्योरी पर ज्यादा रहता है। वे प्रैक्टिल रूप से सक्षम नहीं होते। काफी सालों पहले पाया जा चुका है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी कुछ छात्रों को हार्ट अटैक के समय मरीज को दिए जाने वाले प्राथमिक उपचार की जानकारी नहीं थी।

डॉक्टर का काम ही प्रैक्टिकल रूप से सक्षम होना होता है, लेकिन कुछ छात्र थ्योरी को ही ज्यादा तवज्जो देते थे और पूरी पढ़ाई कर लेते थे। बाद में इन्हें मैदानी स्तर पर काम करने में दिक्कत होती थी। जरा सी बात को लेकर मरीज व डॉक्टरों के बीच विवाद हो जाते थे।

मेडिकल शिक्षकों को किया प्रशिक्षित रू नए पाठ्यक्रम के अनुसार छात्रों को पढ़ाने के लिए मेडिकल शिक्षकों को हाल ही में भोपाल के एक निजी होटल में प्रशिक्षण दिया गया। इन शिक्षकों को पाठ्यक्रम की मोटी-मोटी बातें बता दी हैं।

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