साल भर में जर्ज़र हो गया नया बना फोरेलन मार्ग!

 

सिवनी में पीडी ऑफिस खोले जाने की उठी माँग

(ब्यूरो कार्यालय)

छपारा (साई)। छपारा से गणेशगंज में बंजारी घाट में साल भर पहले कराये गये फोरलेन मार्ग के धुर्रे उड़ने आरंभ हो गये हैं। जिले में एनएचएआई के परियोजना निदेशक के कार्यालय न होने के कारण सड़कों का संधारण उचित तरीके से नहीं हो पा रहा है। लोगों ने सिवनी में एनएचएआई के पीडी कार्यालय की संस्थापना की माँग की है।

फोरलेन सड़क निर्माण में मजबूती और गुणवत्ता के दावे छपारा के हिस्से में खोखले साबित होते दिखायी दे रहे हैं। छपारा से घुनई घाटी गनेशगंज के बीच बनाये गये फोरलेन का 09 किलो मीटर का हिस्सा महज़ एक साल में उखड़ने लगा है। सालों की गारंटी वाली सड़क पर जगह – जगह पेंचवर्क कर ठेकेदार कंपनी ने थिगड़े लगा दिये हैं।

फोरलेन सड़क पर गहरे गड्डे और खतरनाक मोड़, निर्माण कार्य में बरती गयी लापरवाही व गुणवत्ता की अनदेखी बयान कर रहे हैं। पिछले दो सालों में यहाँ आधा सैकड़ा से ज्यादा सड़क हादसे हो चुके हैं। खराब अर्थवर्क के कारण सड़क खस्ताहाल हो रही है। इस मामले में एनएचएआई विभाग के अधिकारी ठेकेदार पर जिम्मेदारी डालकर सड़क में मरम्मत व सुधार कार्य कराने की बात कह रहे हैं।

गौरतलब है कि छपारा नगर से होकर गुजरने वाला नेशनल हाईवे वर्षों पुराना है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी की महत्वाकांक्षी स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत कश्मीर से कन्याकुमारी तक बनाये गये फोरलेन निर्माण में छपारा के इस हिस्से को भी शामिल किया गया है। कम समय में फोरलेन सड़क का निर्माण पूरा कराने सरकार ने 60-60 किलो मीटर के अलग – अलग में निर्माण का ठेका संबंधित कंपनियों को दिया था।

लंबे समय तक बंद रहा निर्माण कार्य : सिवनी के नगझर से लखनादौन के बम्होड़ी तक के 60 किलो मीटर फोरलेन निर्माण का ठेका दक्षिण भारत की मीनाक्षी कंपनी को दिया गया था। इसमें से छपारा से बंजारी घाटी गणेशगंज तक 09 किलो मीटर हिस्से में फोरलेन निर्माण का काम सालों तक वन विभाग की अनुमति के कारण रुका रहा।

वन विभाग से अनुमति मिलने के बाद साल 2017 में उदित इंफ्रास्ट्रक्चर को 09 किलो मीटर हिस्से में फोरलेन सड़क निर्माण का ठेका एनएचएआई ने 68 करोड़ रूपये में दिया था। फोरलेन सड़क निर्माण में गुणवत्ता के लिये एनएचएआई ने थीम इंजीनियरिंग को कंस्लटेंसी नियुक्त किया है। कंस्लटेंसी की देखरेख में फोरलेन का निर्माण कार्य पूरा हुए एक साल का वक्त बीता है लेकिन लंबे समय तक गुणवत्ता की गारंटी वाली फोरलेन सड़क महज़ एक साल में ही खस्ताहाल हो गयी है।

जानकारों के मुताबिक फोरलेन सड़क में मजबूत अर्थवर्क न होने के कारण बिटुमीन की लेयर उखड़ रही है। वहीं फोरलेन के 09 किलो मीटर के हिस्से में दर्जनों स्थानों पर गहरे गड्डे हो गये हैं। बंजारी मंदिर व घुनई घाटी के हिस्से में पहाड़ों को ठेकेदार कंपनी ने सड़क तो बना दी है लेकिन भारी वाहनों की आवाजाही और रफ्तार के मुताबिक सड़क में ढलान तैयार नहीं की गयी है।

पहाड़ी के आसपास के पुल व नालों पर बनायी गयी पुलिया में भी फोरलेन सड़क के लेवल का ध्यान नहीं रखा गया है। सड़क व पुलिया की ऊँचाई अलग – अलग होने के कारण गुजरने वाले तेज रफ्तार वाहन झटके के साथ ही अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार हो रहे हैं। कई बार पुल व पुलियों से गुजरते वक्त हल्के वाहन कई फीट ऊँचाई तक जंप कर जाते हैं जो दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।

मोड़ पर हो रहीं दुर्घटनाएं : फोरलेन बनने से पहले घुनई घाटी में हादसों की संख्या बेहद कम थी जो वर्तमान में फोरलेन सड़क बनने के बाद कई गुना बढ़ गयी हैं। निर्माण एजेंसी पुराने मोड़ को समाप्त कर फोरलेन सड़क को मोड़ रहित बना सकती थी लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया जो वर्तमान में बड़े हादसों का कारण बन रहा है।

13 लोगों की हो चुकी है मौत : इस फोरलेन सड़क पर 2017 से अब तक 45 सड़क हादसों में 13 लोग जान गंवा चुके हैं। पिछले साल बढ़ते हादसों को देखते हुए प्रशासन की सख्ती के बाद एनएचएआई के अधिकारियों ने इस हिस्से का दौरा कर इसे ब्लेक स्पॉट माना था। फोरलेन सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद मई 2018 में एनएचएआई ने इसे अपने हैण्डओवर ले लिया है।

हालांकि अगले कई सालों तक निर्माण एजेंसी उदित इंफ्रास्ट्रक्चर को एंग्रीमेंट के मुताबिक फोरलेन सड़क का मेंटेनेंस करना है लेकिन हैण्डओवर के एक साल बाद ही सड़क दुर्दशा का शिकार हो गयी है। पहली बारिश में ही कई हिस्सों में सड़क से बिटुमिन की लेयर उखड़ चुकी है और बड़े व गहरे गड्डे फोरलेन में दिखायी देने लगे हैं।

15 से 20 फीट में कई जगह पर अलग – अलग हिस्सों में खस्ताहाल सड़क में थिगड़े लगाये गये हैं। इस संबंध में एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वी.पी. गुप्ता से संपर्क करने की मोबाईल पर कई बार कोशिश की गयी लेकिन उन्होंने काल रिसीव नहीं किया।

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