उपेक्षा का शिकार दिख रहा भीमगढ़ बाँध!

 

 

न सिल्ट हटी न हैं सुरक्षा के उपाय, घुप्प अंधेरा पसरा रहता है रात भर!

(फैयाज खान)

छपारा (साई)। संजय सरोवर परियोजना के अभिन्न अंग एशिया के सबसे बड़े मिट्टी का बना भीमगढ़ बाँध सालों से उपेक्षा का दंश भोग रहा है। इस बाँध की तलहटी से सिल्ट न हटाने से इसकी जल संग्रहण क्षमता कम होती जा रही है। वहीं इस बाँध की सुरक्षा के लिये किसी तरह के उपाय न होना भी आश्चर्य का ही विषय माना जा रहा है।

सिवनी जिले के लिये संजय सरोवर परियोजना वाकई एक नायाब तोहफा है तत्कालीन कबीना मंत्री स्व.विमला वर्मा का। एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बाँध की परिकल्पना जिस उद्देश्य को लेकर की गयी थी, कालांतर में वह उद्देश्य कुछ फीका सा पड़ता दिखायी दे रहा है। इस बाँध के पानी का उपयोग केवलारी और पलारी क्षेत्र के लोग ही कर पा रहे हैं। वैसे जिला मुख्यालय में इस बाँध से पेयजल प्रदाय किया जा रहा है।

जानकारों की मानें तो इस बाँध की तलहटी में जमी गाद (सिल्ट) को गर्मी के मौसम में जब पानी कम हो जाता है तब हटा दिया जाना चाहिये थी। विडंबना ही कही जायेगी कि इस बाँध की सिल्ट सालों से कागजों में तो साफ की जा रही है किन्तु हकीकत में इसे साफ नहीं किया जा रहा है। यक्ष प्रश्न यही है कि अगर यहाँ से सिल्ट निकाली गयी है तो उसे डाला कहाँ गया है?

उधर, सिंचाई विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस बाँध की सुरक्षा की माकूल व्यवस्थाएं भी नहीं की गयी हैं। आलम यह है कि रात गहराते ही यह बाँध पूरी तरह अंधेरे के साये में डूब जाता है। यहाँ की प्रकाश व्यवस्था बुरी तरह से चौपट हो गयी है। लाईट विहीन बिजली के खंबों के कारण यहाँ रात्रि में घुप्प अंधेरा पसरा रहता है।

संजय सरोवर बाँध में दूरदराज व विदेशी पर्यटक भी यहाँ इसे देखने के लिये पहुँचते हैं। ऐसे में उचित प्रकाश व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश में विषैले जीव – जन्तु व जंगली जानवरों से किसी भी प्रकार का हादसा घट जाये, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। डेम का एरिया लगभग 1.8 किलोमीटर है और कई माह से यहाँ लगे लगभग 60 बिजली के खंबों में से अधिकांश खंबों की लाईट बंद पड़ी है।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि संजय सरोवर परियोजना से लाखों एकड़ जमीन इस बाँध के पानी से सिंचित होती है। लाखों रुपये रखरखाव के नाम पर खर्च होते हैं, लेकिन सिर्फ बाँध के गेट पर एवं एक दो खंबों पर ही लाईट की व्यवस्था दुरुस्त है। शेष अधिकांश क्षेत्रों में लगे बिजली के खंबों में बल्ब आदि ही नहीं लगे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कहीं बिजली के तार टूटे पड़े हैं तो कहीं बल्ब ही नहीं लगे हैं। बाँध किनारे जंगल लगा है। ऐसे में जंगली जानवरों के बाँध क्षेत्र के आसपास विचरण किये जाने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। क्षेत्रवासियों ने माँग की है कि शीघ्र ही भीमगढ़ डेम के चारों तरफ लगे बिजली के खंबों में प्रकाश की व्यवस्था दुरुस्त की जाये।

वहीं सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि बाँध की लाईट का रख रखाव का काम विद्युत यांत्रिकी (ईएण्डएम) के द्वारा देखा जाता है। कई माह से मेंटनेंस नहीं हुआ है। लाईट व्यवस्था का प्रस्ताव पिछले साल भेजा गया था, पर इसका क्या हुआ शायद ही कोई जानता हो।

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