आखिर इतने बच्चे एनीमिक कैसे हो गये!

 

 

महिला बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के दायरे में!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिले में चल रहे दस्तक अभियान के तहत लगभग एक हजार बच्चों को रक्त अल्पता का शिकार पाया गया है। यह बात सरकारी विज्ञप्ति में कही गयी है। इनके लिये मंगलवार को एक रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया था, जिसमें जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह, जिला पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक सहित सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों ने बड़ी तादाद में रक्तदान किया।

लोगों के बीच इस रक्तदान शिविर को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। लोग इस तरह के शिविर को अनुकरणीय मान रहे हैं। इसके पहले तत्कालीन जिलाधिकारी धनराजू एस. के द्वारा रक्तदान कैलेण्डर बनाया गया था, जिसके तहत रक्तदान शिविरों को निश्चित अंतराल के उपरांत आयोजित किया जाता था, ताकि ब्लड बैंक में रक्त की उपलब्धता साल भर बनी रह सके।

वहीं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि प्रसूताओं और नवजात से लेकर पाँच साल तक की आयु के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिये केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा खजाना खोल दिया जाता रहा है। इसके बाद भी रक्त अल्पता की स्थिति आखिर किस तरह निर्मित हो गयी!

सूत्रों ने यह भी कहा कि सामान्य तौर पर जिस भी मरीज़ को रक्त की आवश्यकता होती है उसके परिजन ही सबसे पहले रक्तदान करते हैं। इस मामले में रक्त अल्पता वाले बच्चों के परिजनों के द्वारा रक्तदान क्यों नहीं किया गया! क्या उनके परिजन भी रक्त अल्पता के शिकार हैं!

चिकित्सकों के अनुसार रक्त अल्पता के कारणों का पता लगाये बिना कि किस कारण खून की कमी हुई है! इस तरह सीधे रक्त चढ़ा दिये जाने से रक्त अल्पता के शिकार बच्चे फौरी तौर पर तो तंदरूस्त हो जायेंगे पर इस बात की क्या गारंटी रह जायेगी कि तीन चार महीने के उपरांत क्या वे पुनः रक्त अल्पता के शिकार नहीं होंगे! अगर ऐसा हुआ तो क्या तीन चार माह बाद फिर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया जायेगा!

इधर, विधान सभा में कुपोषण की रोकथाम के लिये सिवनी विधायक दिनेश राय के द्वारा उठाये गये प्रश्न के जवाब में प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमति इमरती देवी ने कहा कि सिवनी जिले में बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं में कुपोषण एवं रक्त अल्पता को रोकने संबंधित विभाग को राशि का आवंटन हुआ है।

श्रीमति इमरती देवी ने आगे बताया कि इस बीमारी को रोकने पूरक पोषण आहार, मंगल दिवस, लालिमा योजना, सुपोषण आहार एवं अटल बाल मिशन योजना के तहत मदवार इस राशि को व्यय किया गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के द्वारा आयरन, फोलिक एसिड, सीरप एवं गोलियों को भी खरीदा गया था।

महिला बाल विकास मंत्री ने सदन में यह भी कहा कि पोषण पुर्नवास केन्द्रों में गंभीर कुपोषित बच्चों के मानक उपचार एवं प्रबंधन हेतु निःशुल्क चिकित्सीय जाँच, आहार, माताओं के लिये भोजन व जाँच, नैदानिक सेवाएं परिवहन एवं छुट्टी उपरांत फालोअप निःशुल्क सुविधाएं उपलब्ध हैं।

यहाँ यह उललेखनीय होगा कि इतना सब कुछ होने के बाद भी जिले में एक साथ एक हजार बच्चे रक्त अल्पता के शिकार कैसे निकल आये। सूत्रों का कहना है कि अगर दस्तक अभियान नहीं चलाया गया होता तो यह स्थिति भी सामने नहीं आती। इसके लिये जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही किया जाना चाहिये।

(क्रमशः जारी)

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