जायरा से पहले इन सिलेब्स ने भी कहा था वालीवुड को बॉयबॉय

 

 

(उपमा सिंह)

अपनी पहली ही फिल्म में दमदार परफॉर्मेंस के लिए नैशनल अवॉर्ड जीतने वाली ऐक्ट्रेस जायरा वसीम ने पिछले दिनों यह कहते हुए ऐक्टिंग छोड़ने की घोषणा कर दी कि वह इस काम से खुश नहीं है, क्योंकि यह उनके धर्म के रास्ते में आ रहा है। सोशल मीडिया पर लिखे एक लंबे पोस्ट में उन्होंने कहा कि बॉलिवुड ने बेशक उन्हें नाम, प्यार और शोहरत दिया, लेकिन उन्हें अज्ञानता के रास्ते पर भी धकेल दिया और वह ईमान के रास्ते से भटक गईं। इससे धर्म के साथ उनका रिश्ता खतरे में पड़ गया। इसके बाद से ही जायरा के इस फैसले को लेकर बहस तेज है। हालांकि, जायरा ऐसी अकेली सिलेब्रिटी नहीं हैं, जिन्होंने धर्म की खातिर बॉलिवुड को छोड़ने की बात कही है। इससे पहले भी बॉलिवुड के कई सिलेब्स कभी धर्म, कभी अध्यात्म तो कभी शांति की तलाश में इस ग्लैमर इंडस्ट्री की चकाचौंध से दूरी बना चुके हैं।

जायरा का सच जो भी हो, लेकिन ऐसा पहले भी हुआ है, जब रूढ़िवादी परिवारों में कलाकार बनने का सपना देखने वाली प्रतिभाओं पर मजहब की बेड़ियां लगाने की कोशिश की गई है। कुछ वक्त पहले ही फिल्म गली बॉय के रियल स्टार रैपर नेजी, जिनकी जिंदगी पर यह फिल्म बनी है, ने बताया था कि कैसे परिवारवालों के विरोध के चलते मेहनत से कमाई अपनी शोहरत को छोड़कर वे रैप सीन से गायब हो गए थे। मुंबई स्थित कुर्ला के एक चॉल में रहने वाले नेजी उर्फ नावेद शेख बताते हैं कि वह एक रूढ़िवादी माहौल में पले-बढ़े हैं, जहां रैप को अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता। उनके घरवाले नहीं चाहते कि वह रैप में अपना करियर आगे बढ़ाएं।

चूंकि, इस्लाम में म्यूजिक की कमाई को हराम माना जाता है, इसलिए कई बार घर में उनके कमाए हुए पैसे भी नहीं लिए जाते हैं। वह अपने घरवालों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, इस पर मुफ्तियों और मौलवियों से भी सलाह लेनेवाले हैं। इसी तरह, कहा जाता है कि महान गायक मोहम्मद रफी ने भी कभी मौलवियों के कहने पर अपने करियर के पीक पर फिल्मों में गाना बंद कर दिया था। यह बात सत्तर के दशक की है, जब मोहम्मद रफी हज पर गए, तो उनसे कहा गया कि अब आप हाजी हो गए हैं। इसीलिए, अब आपको गाना-बजाना बंद कर देना चाहिए। बेहद सीधे, सच्चे और शरीफ मोहम्मद रफी ने उनकी सलाह मानकर गाना छोड़ दिया, जिससे सब दंग रह गए, लेकिन बाद में सबके समझाने पर उन्होंने दोबारा गाना शुरू कर दिया। इन दिनों कैंसर से जंग लड़ रहीं ऐक्ट्रेस नफीसा अली ने भी बताया कि उनके पिता उनके मॉडलिंग-ऐक्टिंग करियर के खिलाफ थे। उनका मानना था कि उनके खानदान की लड़कियां नाच-गाना नहीं करतीं, इसलिए उन्होंने नफीसा को सपोर्ट नहीं किया।

जायरा की तरह, करियर की बुलंदी पर अभिनय छोड़ने का हैरान करने वाला फैसला लेने वाले कलाकारों की भी कोई कमी नहीं है। इसमें सबसे पहला नाम मरहूम अभिनेता विनोद खन्ना का आता है। विनोद खन्ना अस्सी के दशक में तब ऐक्टिंग छोड़कर आध्यात्मिक गुरु ओशो के शिष्य बन गए, जब वह कुर्बानी और द बर्निंग ट्रेन जैसी फिल्मों के सुपरहिट होने के बाद सफलता के शिखर पर थे। इसी तरह, फिल्म आशिकी से रातोंरात स्टारडम हासिल करने वाली अनु अग्रवाल ने भी छह साल बाद ही ग्लैमर जगत को अलविदा कह दिया था। जबकि, तब उन्हें बॉलिवुड ही नहीं, हॉलिवुड से भी आकर्षक ऑफर मिल रहे थे, लेकिन मैं कौन हूं? की तलाश में वह इस ग्लैमरस करियर छोड़कर उत्तराखंड के आश्रम में योग-साधना करने चली गईं। 12 साल तक योग साधना करने वाली अनु तंत्र विद्या, आयुर्वेदिक म्यूजिक थेरेपी, सूफिजम आदि की सर्टिफाइड योग गुरु हैं। कभी ऐश्वर्या राय बच्चन और सुष्मिता सेन के साथ मिस इंडिया के खिताब के लिए मुकाबला करने वालीं मॉडल-अभिनेत्री बरखा मदान भी बाद में बौद्ध धर्म अपनाकर नन बन गईं। वहीं, सुपरहिट फिल्म प्यार तो होना ही था, में काजोल के मंगेतर राहुल का किरदार निभाने वाले ऐक्टर बिजय आनंद भी अपने चढ़ते करियर को छोड़कर योग साधना में रम गए। लंबे समय तक योग साधना के बाद बिजय आनंद भी अब योग गुरु बन चुके हैं।

मायानगरी से मोहभंग होने के बाद कुछ सिलेब्स ने यहां की चमक-दमक से दूर प्रकृति के सानिध्य में भी खुशी तलाशी। इनमें कयामत से कयामत तक और जो जीता वही सिकंदर जैसी फिल्मों के निर्देशक मंसूर अली खान का नाम भी शामिल है। मंसूर कई सालों से फिल्मों से दूर कुन्नूर में फार्मिंग कर रहे हैं। वहीं, साराभाई वर्सेस साराभाई के रोशेस के रूप में मशहूर अभिनेता राजेश कुमार भी पिछले दिनों मुंबई दूर बिहार के अपने गांव में जाकर खेती कराते नजर आए थे।

(साई फीचर्स)