कुपोषण मिटाने अच्छा काम हो रहा तो . . .

 

 

 

 

उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को किया कटघरे में खड़ा

(ब्यूरो कार्यालय)

ग्वालियर (साई)। दस्तक अभियान को लेकर न्यायालय ने प्रश्न करते हुए कहा कि सिर्फ दस्तक अभियान क्यों! कुपोषण के मामला रोजाना किया जाने वाला काम है।

हाईकोर्ट की युगल पीठ ने कुपोषण को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब विभाग अच्छा काम कर रहा है तो बच्चों की मौत क्यों हो रही है। क्या आपके अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं। काम नहीं करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं।

कोर्ट ने स्वास्थ्य आयुक्त नीतेश व्यास से पूछा कि क्या आप अपनी पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट से संतुष्ट हैं। खुद रिपोर्ट को पढ़िए और तय कीजिए। बहस के बाद कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया।

वर्ष 2016 में एसके शर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सर्वाेच्च न्यायालय ने कुपोषण को लेकर कई आदेश दिए हैं उन आदेशों का सही से पालन नहीं हुआ है। केन्द्र व राज्य सरकार कुपोषण खत्म करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। बावजूद इसके कुपोषण से मौतें हो रही हैं।

श्योपुर जिले में 2016 में 116 मौतें हुई हैं, इसके लिए वहां का प्रशासन जिम्मेदार है। कोई भी योजना आती है तो उसका संचालन कलेक्टर कराते हैं। उन्होंने योजनाओं के संचालन में लापरवाही बरती है और रहवासियों तक वह पहुंची ही नहीं हैं। इस कारण जिले में 116 मौतें हुई हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से ताजा स्थिति मांगी थी, जिसमें बताया गया कि श्योपुर में कुपोषण की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है जिससे लगातार बच्चों की मौतें हो रही हैं।

कोर्ट ने ताजा स्थिति पर शासन से जवाब मांगा था। इसके बाद शासन ने एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें कुपोषण को नियंत्रण में बताया गया। साथ ही अभियान व योजनाओं की जानकारी भी दी। लेकिन शासन की इस रिपोर्ट से कोर्ट असंतुष्ट था, इसके चलते स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त को तलब कर लिया।

स्वास्थ्य आयुक्त नीतेश व्यास गत दिवस कोर्ट में उपस्थित हुए और उनसे कोर्ट ने कई सवाल किए। आयुक्त की ओर से बताया गया कि दस्तक अभियान चलाया जा रहा है। बच्चों को चिन्हित कर एसएनसीयू में भर्ती कराया जा रहा है, जिलों में एसएनसीयू संचालित हैं। 350 बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है।

कोर्ट ने आयुक्त का जवाब सुनने के बाद कहा कि आदिवासी समुदाय में ही कुपोषण ज्यादा है। इनके बच्चों की सुरक्षा के कदम क्यों नहीं उठाए जाते हैं। कुपषोण को लेकर दस्तक अभियान की जरूरत नहीं है, ये तो रोजाना किया जाने वाला कार्य है। आशा कार्यकर्ता भी अच्छे से कार्य नहीं कर रहे हैं, कोर्ट ने याचिका पर आदेश के लिए फैसला सुरक्षित कर लिया है।