प्रदेश के ढाई हजार नर्सिंग होम हिमाचल ने दिए अयोग्य करार!

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। प्रदेश से नर्सिंग कोर्स पढ़कर गए ढाई हजार युवाओं की योग्यता पर हिमाचल सरकार ने सवाल खड़े किए हैं। मध्यप्रदेश को पत्र भेजकर उन्होंने यहां से पढ़ाई पूरी कर वहां गए छात्रों की जांच की मांग की है।

विधानसभा में यह जानकारी देते हुए कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना ने आरोप लगाया कि प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज की अनुमति की बोली एक-एक करोड़ रुपए में लगी। ऐसी संस्थाओं को भी अनुमति दे दी गई, जिनके पास 200 वर्गफीट जगह भी नहीं है। कुछ तो नीचे अस्पताल और कॉलेज चला रहे हैं।

डुप्लेक्स भवन में भी कॉलेज चल रहे हैं। लिहाजा, अनुमति देने के मामले की सीबीआई से जांच करवाई जाए। नर्सिंग कॉलेज की मान्यता के मामले को गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिक्षा की गुणवत्ता के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाने की घोषणा की।

विनय सक्सेना ने प्रश्नकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि 2018 में 350 नर्सिंग कॉलेजों को अनुमतियां दी गईं। इसमें से कई शर्तें ही पूरी नहीं करते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जबलपुर में अमर ज्योति नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई, यह डुप्लेक्स में चलता है। करीब 127 कॉलेज हैं जो छत पर या दो-दो कमरों में चल रहे हैं।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से 529 निजी नर्सिंग कॉलेजों के आवेदन आए थे। इनमें से 353 को मान्यता दी गई। मापदंड के हिसाब से ऑनलाइन आवेदन हुए और उन्हें अनुमति दी गई। नियम कहता है कि जब शिकायत होगी तो संस्थाओं की जांच की जाएगी। सक्सेना ने जवाब से असंतुष्ट होते हुए कहा कि आधे कॉलेजों के पास 200 वर्गफीट भी जगह नहीं है।

पैसों का लेन-देन कर अनुमतियां दी गई। हिमाचल प्रदेश के पत्र को भी संज्ञान में नहीं लिया गया। इसमें जो मुद्दा उठाया गया वो मध्य प्रदेश पर कलंक है। 12 प्रकरण ईओडब्ल्यू में दर्ज हो चुके हैं। इस पूरे मामले को जांच के लिए उन्हें ही सौंप दिया जाए। एसआईटी गठित कर पूरे कॉलेजों की जांच करवाई जानी चाहिए। मंत्री ने पत्र को लेकर कहा कि आप मेरी जानकारी मैं लाए हैं, इसकी अलग से जांच करवाएंगे।

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि नर्सिंग कॉलेजों में सिर्फ डिग्री या डिप्लोमा देने का काम होगा तो बेहतर नर्सिंग का काम नहीं कर सकते हैं। यह स्थिति शिक्षा के क्षेत्र में भी है। ऐसे बीएड और डीएड कॉलेज सैंकड़ों की संख्या में खुल गए हैं, जो एक दिन के लिए भी आ जाओ तो डिग्री या डिप्लोमा दे देंगे।

कंप्यूटर का डिप्लोमा भी बाजार में बिक रहा है। इन सभी मामलों की जांच होनी चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने भी इसका समर्थन करते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री से कहा कि उच्च स्तरीय समिति का ऐसा गठन करें, जिससे वास्तविक रूप में हर जिले में दिखे कि आपने कड़ाई की है।

न मजदूर बनने लायक और न इंजीनियर : मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि कोई इंजीनियर बनकर गया तो उन्हें रोजगार भी मिलना चाहिए। मैंने कंपनियों से चर्चा की तो वे बोले 18-20 को रख लेंगे, लेकिन रखते नहीं थे। एक दिन जब उन्हें बुलाकर पूछा तो उन्होंने कहा कि साक्षात्कार में पहला प्रश्न था कि अपना परिचय लिखिए, वो वह भी नहीं लिख पाए।

हमारी व्यवस्था ऐसी रही कि जिसमें उनके हाथ में डिग्री तो रही पर वे न मजदूर बनने लायक रहे और न ही इंजीनियर। हम बच्चों को धोखा दे रहे हैं, क्योंकि बच्चा गांव से कॉलेज आता है और बीई आदि लिखता है पर काम नहीं मिलता तो वो न गांव का रहता है और न शहर का। गांव में उसका मजाक उड़ता है। हम एक समिति बनाएंगे, जो शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता पर काम करेगी।