चमड़े के सिक्के चलाये सीएमएचओ ने!

 

 

नियम एक माह का बढ़ा दी तीन माह की समयावधि!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में क्या हो रहा है इस बारे में अगर बारीकी से जाँच हो जाये तो जाँच अधिकारी भी दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे। मोबलिटी एवं आरबीकेएस वाहनों के मामले में तो सीएमएचओ के द्वारा सारी हदें ही पार कर दी गयी हैं।

सीएमएचओ कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मोबलिटी एवं आरबीकेएस वाहनों के संचालन हेतु वित्तीय वर्ष 2018 – 2019 के लिये निविदा आमंत्रित की गयी थी। इसके उपरांत सीएमएचओ कार्यालय के द्वारा दिलीप ऑटो डील टूर एवं ट्रेवल्स को 11 अप्रैल 2018 कार्यादेश जारी किया गया था।

सूत्रों ने बताया कि 31 मार्च को यह ठेका समाप्त हो रहा था, एवं अप्रैल माह में लोकसभा की आचार संहिता प्रभावी हो सकती थी, इस लिहाज़ से फरवरी माह में ही नयी निविदा आमंत्रित की जा सकती थी, किन्तु सीएमएचओ कार्यालय के द्वारा इस तरह की कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया गया।

सूत्रों ने आगे बताया कि प्रभारी सीएमएचओ डॉ.के.सी. मेश्राम के हस्ताक्षरों से 30 मार्च को एक आदेश जारी किया गया। इस आदेश में दिलीप ऑटो डील से कहा गया था कि चूँकि उस समय लोक सभा चुनावों की आचार संहिता प्रभावी थी इसलिये नवीन निविदा की कार्यवाही पूर्ण नहीं की जा सकती थी।

सूत्रों ने कहा कि इस पत्र में कहा गया था कि स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग के साथ दिलीप ऑटो डील के द्वारा किया गया अनुबंध तीन माह (30 जून) तक के लिये बढ़ा दिया गया था। सूत्रों ने कहा कि नियमानुसार अनुबंध किसी भी कीमत में एक माह से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता है।

सूत्रों की मानें तो बात यहीं समाप्त नहीं हुई। इसके बाद लोकसभा चुनाव संपन्न हुए और लोकसभा चुनावों के बाद आचार संहिता निष्प्रभावी भी हो गयी, तब भी सीएमएचओ के द्वारा मोबलिटी एवं आरबीकेएस वाहनों के लिये नयी निविदा की कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया गया। सूत्रों ने यह भी कहा कि सीएमएचओ अगर चाहते तो इस अत्यावश्यक सेवा की निविदा के लिये चुनाव आयोग से विशेष अनुमति लेने की कार्यवाही की जा सकती थी।

सूत्रों ने आश्चर्य जनक बात बताते हुए कहा कि 30 जून को समाप्त होने वाली अनुबंध की अवधि को एक बार फिर उनके द्वारा 01 जुलाई को एक माह की बजाय सीधे तीन माह (30 सितंबर) तक के लिये बढ़ा दिया गया। दोनों ही बार समयावधि बढ़ाते समय उच्चाधिकारियों का अनुमोदन लेना भी सीएचएचओ कार्यलय ने मुनासिब नहीं समझाा। इस तरह की कार्यवाही नियमानुसार उचित नहीं है। सूत्रों ने कहा कि इस बात की अगर निष्पक्ष जाँच करवा ली जाये तो सीएमएचओ कार्यालय के पास इसका कोई ठोस जवाब शायद ही मिल पाये!