मोबाइल फोन छोड़ भागा गुंडा, बिल्डर और साथी को पकड़ा

 

 

 

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)

इंदौर (साई)। चाकू से 50 वर्षीय महिला की हत्या करने वाला गुंडा अभी भी नहीं पकड़ा गया है। वह मोबाइल फोन घर पर छोड़कर भाग गया। संदेही बिल्डर और साथी को पकड़ कर पूछताछ की जा रही है। तीन युवकों के नाम सामने आए हैं जिन पर हत्यारे की सहायता करने का संदेह है।

एएसपी (पूर्वी) शैलेंद्रसिंह चौहान के अनुसार हनुमान चौक (एलआईजी) निवासी राधा पति ओमप्रकाश कुशवाह की गुरुवार रात नकाबपोश बदमाश सुमेर पंडित ने चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी। वारदात के बाद पुलिस को सुमेर के मोबाइल की लोकेशन घटना स्थल से थोड़ी दूर जगजीवन रामनगर की मिली। देर रात पुलिस ने उसके घर छापा मारा तो मोबाइल फोन मिल गया। उसका पिता भी घर छोड़कर फरार हो गया।

पुलिस ने अन्य परिजन को थाने में बैठा लिया है। राधा की बहू पिंकी और बेटे शैलेंद्र ने कहा कि वह 12 वर्षों से पीयूष गांधी के मकान में किराए से रहते हैं। पीयूष और उसके साथी महेश गेहलोत, पंकज खंडेलवाल मकान खाली करने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने सुमेर को ठेका दिया था। पिछले वर्ष अगस्त में भी सुमेर ने धमकाया था। उसके खिलाफ एमआईजी थाने में केस दर्ज है।

देर रात पुलिस ने पीयूष को कॉल किया तो वह थाने आ गया। महेश को भी हिरासत में ले लिया गया है। पीयूष निवासी स्कीम-54 ने कहा कि उसके पिता अरुण कुमार गांधी ने 30 वर्ष पहले मकान खरीदा था जिसमें राधा कुशवाह, बाबूलाल चौहान, हितेश अग्रवाल और संतोष का परिवार रहता है। दो वर्ष पहले राधा के पति ओम कुशवाह ने आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट में पीयूष, पंकज और महेश का नाम था। पुलिस ने पीयूष और एक अन्य को गिरफ्तार कर लिया लेकिन चालान से नाम निकालने की कोशिश जारी थी। देर रात एसपी (पूर्वी) मो. युसूफ कुरैशी ने केस डायरी देख एसआई को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि पुलिस आरोपितों से मिली है। तुम्हारे खिलाफ जांच करवाऊंगा।

भूमाफिया के साथ फरारी काट रहा था हत्या में संहेदी बिल्डर

पंकज खंडेलवाल के खिलाफ 20 दिन पहले ही विजयनगर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। इसमें भूमाफिया मुख्तियार भी आरोपित है। वह मुख्तियार के साथ फरारी काट रहा था। ओमप्रकाश कुशवाह आत्महत्या कांड में भी पंकज आरोपित है। फरार आरोपित सुमेर के खिलाफ भी कई केस दर्ज हैं। उसका थाने भी आना-जाना था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि घटना स्थल के समीप अर्पित, सुमित और गोपाल खड़े हुए थे।